पाठ के लेखक और तुम्हारे शिक्षक की परस्पर भेंट: वाह! क्या बात है/खोज-खबर: पाठ से आगे

कक्षा-8 वीं के प्यारे विद्यार्थियो,
तुम लोग तो जानते ही हो कि हर पाठ से आगे जाकर हम खुले आकाश के नीचे कुछ खोज-खबर लेने में जुट जाते हैं। तुमने कई बार लेखकों-कवियों के बारे में पूछ-पूछकर हमें भी अपना-सा जिज्ञासु बना ही दिया। तो लो हमने भी ठान लिया कि समय-समय पर उन तमाम सवालों से आगे जाकर उन्हीं लेखकों-कवियों से तुम्हारा सामना करायेंगे या तुम्हारे प्रतिनिधि बनकर वो सब जानने की कोशिश करेंगे जो तुम लोग हम शिक्षकों से पूछा करते हो।
इसी टोह में हमने मुलाकात की तुम्हारे प्रिय पाठ ‘चिट्ठियों की अनूठी दुनियाँ’ के लेखक श्री अरविंद कुमार सिंह जी से।
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पहले बताते हैं कि हमें वे कौन-सी बातें उन्होंने बताईं जो तुम्हारे पाठ से आगे की हैं और जो तुम्हारी आंखों में चमक पैदा कर देंगी।
पहली बात उनकी मूल पुस्तक नेशनल बुक ट्रस्ट से अंग्रेजी में प्रकाशित है ‘द हिस्ट्री ऑफ इंडियन पोस्ट’ उसी के एक अध्याय का यह पाठ तुम्हारी पुस्तक बसंत भाग-तीन में संकलित है। उन्होने अपने बैग से वह पुस्तक मुझे दिखाई। अच्छा लगा। उन्होने एक बात और बताई कि ‘द पोस्टमेन’ अध्याय डाकिया के नाम से तुम्हें आगे किताबों में पढने को मिलेगा। उन्होंने एक बात और बताई कि समुद्री मार्ग से पुराने समय में जो पत्राचार होता था वे उस पर खोजबीन कर रहे हैं। उस पर भी किताब लिख रहे हैं।
अब एक और सबसे मजेदार बात कि हमने उनसे दो ऐसे प्रश्न पूछे जो आप हमसे पूछते हो कि लेखक को कैसे पता चला होगा कि भारत में प्रतिदिन ‘‘साढे चार करोड चिट्ठियां डाक में डाली जाती हैं’’???? मैंने उन्हीं से पूछ लिया । उन्होंने बताया कि डाक भवन, नई दिल्ली के जो उच्च अधिकारी हैं उनके माध्यम से यह जानकारी उन्हें मिली जो उन्होंने शोध कर अपनी पुस्तक में लिखी है।
आओ, अब मैं तुम्हें उनका संक्षिप्त परिचय देता हूँ। जो तुम्हारी पुस्तक में नहीं है। 7 अप्रेल सन् 1965 को उत्तरप्रदेश के बस्ती जिले में जन्मे श्री अरविंद जी इलाहाबाद विश्वविद्यालय से कला स्नातक हैं। वे बीते करीब 30 सालों से हिन्दी पत्रकारिता व लेखन से जुड़े हैं। वे जनसत्ता एक्सप्रेस, चौथी दुनिया, अमर-उजाला, इंडियन एक्सप्रेस में कार्य के साथ-साथ हरिभूमि के दिल्ली संस्करण में संपादक भी रहे हैं। वर्तमान में वे राज्यसभा चैनल के विशेष संवाददाता भी हैं। साथ ही रेलवे बोर्ड के परामर्शदाता भी हैं। वे महामहिम राष्ट्रपति जी द्वारा सम्मानित, हिन्दी अकादमी दिल्ली द्वारा हिन्दी पत्रकारिता में योगदान के लिए पुरस्कृत होने के साथ-साथ अनेके प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं।
हाँ, चलते चलते डॉ जयंत जी का आभार जिन्होनें मुझे उनका मित्र बनाया।
अगली बार नयी खोज-खबर के साथ,
आपका
राम सर
देखिये उन्‍होंने हमारी पोस्‍ट को चेहरे की किताब यानी कि फेसबुक पर बांटा, नई जानकारी भी दी, अपने बारे में;;;;;; और तुम लोगों से मिलने का वायदा भी किया है।

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