दो कविताएं मिलीं – ‘सर्जना’ / ‘ आओ जिंदगी को रिचार्ज करें

सर्जना –

सर्जना मन का घरौंदा है
इसे बना लो
सर्जना रचना का संसार है
इसे बसा लो
सर्जना भावों का ज्‍वार है
इसे उमडने दो
सर्जना मन की टीस है
इसे निकलने दो
सर्जना व्‍यथा और पीडा की अभिव्‍यक्‍ति है
इसे बहने दो
सर्जना परिवर्तन्‍ा का आह्वान है
इसे होने दो
सर्जना क्रांति का शंखनाद है
इसे बजने दो
सर्जना विरूदावली है
सर्जना कोमलकांत पदावली है
सर्जना मानवता का आराधन है
सर्जना जोडने का एक साधन है
सर्जना मूल्‍यों का संचार है
सर्जना गुणों का आधार है
सर्जना एक सुंदर सा सपना है
सर्जना एक संसार नितांत अपना है
सर्जना शाम की सुरीली तान है
सर्जना जीवन की मधुर जान है
सर्जना इंसानियत की धरोहर है
सर्जना हर युग के लिए मनोहर है
सर्जना बिना संसार अधूरा है
सर्जना से ही संसार पूरा है

अमरनाथ, बिलागुडी छावनी


आओ जिंदगी को रिचार्ज करें –


चुप क्‍यूं हो
कुछ तो बोलो
आखिर अपना मुंह तो खोलो
क्‍यूं हो ऐसे बेहाल
बीत जायेगा ये काल
गुस्‍सा छोडो, मत हो लाल
आओ कुछ ऐसा काम करें
किसी की जिंदगी में रंग भरें
दें उसे खुशियां हजार
ताकि हासिल हों दुआएं बार-बार

उमर फारूख, दोणिमलै, कर्नाटक

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