ये लड़की बिल्कुल सीधी चलती है /कभी फिसली तो संभल जायेगी।

चंद गजलें –

एक
ये बैठक भी निकल जायेगी
एक घंटे की आफत है, टल जायेगी।
‘परिपत्र बहुत डराते हैं हमें’
जरा-सी बात मुंह से निकल जायेगी।
ये लड़की बिल्कुल सीधी चलती है
कभी फिसली तो संभल जायेगी।
हर तरफ पानी भर गया, फाइल-
भीगी तो अच्छा है, गल जायेगी।

दो-
फिर कोई सरसराहट दौड़ानी होगी।
बात बहुत जम रही है, हिलानी होगी।
कन्नड़ में ‘कुत्ते’ को ‘नाई’ कहते हैं
ये बात नाई से छुपानी होगी।
स्कूल के पिछवाड़े मिलते हैं दो दिल
ये बात प्राचार्य को बतानी होगी।
उस तरफ के लोग नहीं दिखते हैं
ये ऊंची दीवार गिरानी होगी।

तीन-
नया जाल बिछाना होगा
आदमी को सुलाना होगा।
निरीक्षक आ रहे हैं, कि-
ये सामान हटाना होगा।
स्वागत के बोल गूँजेंगे
बाजा भी बजाना होगा।
साहब ने बजा दी घंटी
प्रहरी को बुलाना होगा।
चलो कवितायें बंद करें।
आज तो नहाना होगा।

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