डॉ. रामकुमार सिंह की परियोजना को एनसीईआरटी का राष्ट्रीय पुरस्कार

नवाचार के क्षेत्र में प्रयोग एवं अभ्यास के लिए एनसीईआरटी की राष्ट्रीय सेमीनार में लिया हिस्सा



नई दिल्‍ली/ग्वालियर/मुरैना/दोणिमलै। भारत में शिक्षा के क्षेत्र में नवाचारी प्रयोगों की खोजबीन और अभ्यास के लिए प्रतिवर्ष दिये जाने वाले राष्ट्रीय पुरस्कारों की श्रेणी में मुरैना निवासी डॉ. रामकुमार सिंह, पीजीटी-हिन्दी, केविसं की परियोजना को राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया है।
एनसीईआरटी के अध्यापक शिक्षा एवं विस्तार विभाग द्वारा 5 से 6 जून 2012 को एनसीईआरटी,नई दिल्ली स्‍थित चाचा नेहरू भवन, सीआईईटी में आयोजित राष्ट्रीय सेमीनार में परियोजना दल के मुख्य अन्वेषक एवं समन्वयक के रूप में डॉ. सिंह को प्रजेन्टेशन के लिए आमंत्रित किया गया था।
डॉ. सिंह की परियोजना के तहत 11 सदस्यीय दल ने ”चैलेन्जेज फॉर ट्रान्सफर ऑफ लर्निंग टुवर्ड्स मल्टीलिंग्वल टारगेट ग्रुप एण्ड कनवर्टिंग द टेक्स्ट इन टु एक्टिविटी बेस्ड कम्यूनिकेबल कन्स्प्ट” शीर्षक से 10 से अधिक भारतीय भाषाओं के 2 सैकड़ा विद्यार्थियों के साथ प्रयोग करते हुए मातृभाषाओं के सम्बन्ध उल्लेखनीय अनुशंसाऍं एनसीईआरटी के समक्ष रखी थीं जिन्हें महत्वपूर्ण माना गया। पुरस्कार के तहत 20 हजार रूपये की राशि परियोजना संचालन के लिए सम्बन्धित विद्यालय को प्रदान करने की घोषणा भी की गई है।
उल्लेखनीय है कि डॉ. रामकुमार सिंह की परियोजना केन्द्रीय विद्यालय दोणिमलै, कर्नाटक में संचालित की गई थी। हाल ही में डॉ सिंह स्थानांतरित होकर केन्द्रीय विद्यालय मुरैना में पदांकित किये गये हैं।

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