हिन्दी शिक्षकों का संगम : श्रद्धा, आस्था एवं विश्वास की त्रिस्तरीय ऊर्जा

प्रस्तुति: डॉ. शेषकुमारी सिंह(स्‍नातक शिक्षिका,हिन्‍दी,केवि-वायुसेनाकेन्‍द्र, ओझर, मुम्‍बई संभाग)

(केन्द्रीय विद्यालय ओल्ड कैंट इलाहाबाद में स्नातक हिन्दी शिक्षकों का प्रशिक्षण शिविर 8 जून से 19 जून 2011 तक आयोजित किया गया था। इस शिविर में हिन्दी शिक्षण के विविध आयामों पर कई अच्छे नतीजे सामने आये। शिक्षक दिवस आ रहा है। इसलिए एक और पोस्ट शिक्षा के बारे में जारी की जा रही है। शिविर के अकादमिक उपलब्धियों और छायाचित्र गैलरी यहां आमंत्रित सर्जनाकार डॉ. शेषकुमारी सिंह के सौजन्य से उपलब्ध है। आशा है सभी हिन्दी साथी इसका अवलोकन कर प्रतिक्रिया से अवगत करायेंगे – संपादक डॉ. रामकुमार सिंह)

8 जून 2011 को सेवाकालीन हिन्दी स्नातकोत्तर शिक्षक प्रशिक्षण शिविर का शुभारम्भ मुख्य अतिथि माननीय डॉ पी के तिवारी, सेवानिवृत उपायुक्त केविसं, के करकमलों से विद्या की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती के चित्र के सम्मुख दीप-प्रज्ज्वलन एवं माल्यार्पण के साथ सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर शिविर निदेशक श्री बी दयाल, सह-निदेशक श्री रामजी गिरि, संसाधिका श्रीमती मधुश्री शुक्ला, श्रीमती अंजुम एवं श्रीमती इंदिरा सिंह के द्वारा भी मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर भावांजलि प्रस्तुत की गई।
शिविर निदेशक श्री बी दयाल प्राचार्य केवि ओल्ड कैंट इलाहाबाद ने मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए शिविर के उद्देश्य एवं उसकी सार्थकता पर प्रकाश डाला। तत्पश्चात शिविर के प्रतिभागियों के द्वारा अपना अपना परिचय प्रस्तुत किया गया। माननीय मुख्य अतिथि डॉ पी के तिवारी ने प्रतिभागियों को आशीर्वचन देते हुए शिविर की सफलता की कामना की। कार्यक्रम के अंत में सह निदेशक श्री रामजी गिरि ने मुख्य अतिथि के प्रति आभार व्यक्त किया। इस कार्यक्रम का सफल संचालन श्रीमती मधुश्री शुक्ला के द्वारा किया गया। स्वल्पाहार के पश्चात सभी प्रतिभागी पूर्व परीक्षा में सम्मिलित हुए।

भोजनोपरांत द्वितीय सत्र में प्राचार्य श्री बी दयाल केवि ओल्ड कैंट ने पावर प्वांइट के माध्यम से दो रोचक और ज्ञानवर्धक जानकारियां दीं, जिनका सार था कि हमें अपने विद्यार्थियों को प्रसन्न रहने और सकारात्मक सोच विकसित करने की प्रेरणा देनी चाहिए। इस उपयोगी जानकारी के उपरांत सांयकालीन चाय के उपरांत संसाधिका श्रीमती मधुश्री शुक्ला ने प्रतिभागियों का समूह विभाजन किया। सत्य, निष्ठा, न्याय, ईमान, अहिंसा समूह में सात-सात प्रतिभागियों को बांटकर संसाधिका महोदया ने प्रत्येक समूह को कार्य आबंटित किये। – सत्य समूह का प्रतिवेदन।
9 जून को प्रातःकालीन सभा का शुभारम्भ सत्य समूह की प्रार्थना-सभा से हुआ। प्रार्थना, प्रतिज्ञा, सुविचार और मुख्य समाचारों के उपरांत विशेष प्रस्तुति के अंतर्गत श्री राजीव कुमार सिंह जी ने लयबद्ध कवितावाचन किया जिसका शीर्षक था- दीवानों की हस्ती। प्रार्थना-सभ की समाप्ति श्री गंगाधार जी द्वारा दिनांक 8 जून के प्रतिवेदन वाचन के साथ हुई।

दिन के प्रथम सत्र में शिविर निदेशक श्री बी दयाल जी ने ‘आओ सीखें’ के अन्तर्गत सभी प्रतिभागियों को सफल अध्यापक बनने की प्रेरणा दी। श्री राजीव कुमार जी ने कबीर के पद पढ़ाये। तत्पश्चात सह निदेशक श्री राम जी गिरि ने वैयक्तिक भिन्नताओं के आधार पर शिक्षण विषय पर प्रकाश डालते हुए विभिन्न छात्रों के लिए अपनाई जाने वाली विभिन्न युक्तियां बताईं। मध्यान्ह भोजन के पश्चात दिवस के द्वितीय सत्र में शिविर की संसाधिका श्रीमती अंजुम जी ने आदर्श पाठ-योजना के रूप में ‘अलंकार’ प्रकरण पढ़ाया। इस कक्षा में सभी प्रशिक्षणार्थियों ने पूर्ण सहभागिता का प्रदर्शन किया। जिससे कक्षा के बाद संसाधिका श्रीमती मधुश्री शुक्ला ने सफल शिक्षक के गुण बताये तथा समय के साथ नवाचारी बनने की प्रेरणा दी। तत्पश्चात श्री माणिक कुमार जी, स्नातकोत्तर शिक्षक- संगणक विज्ञान, ने संगणक की मूलभूत अवधारणाओं से सभी को अवगत कराया तथा इसका व्यावहारिक अभ्यास भी कराया। सूचना एवं तकनीक के युग की ओर चरण बढ़ाने के उत्साह तथा रुचिकर संगणक शिक्षा के साथ दिवस के प्रशिक्षण को विराम मिला। – निष्ठा समूह का प्रतिवेदन


(मार्गदर्शन)

11 जून को प्रातःकालीन सभा का शुभारम्भ निष्ठा समूह की प्रार्थना सभा से हुआ। प्रार्थना, प्रतिज्ञा, सुविचार और मुख्य समाचारों के उपरांत विशेष प्रस्तुति के अंतर्गत श्री एस एल पाण्डेय जी ने स्वरचित कविता के माध्यम से प्रयाग प्रशस्ति का सुमधुर स्वर में गायन किया। प्रतिवेदन श्रीमती गीता सबरवाल जी के द्वारा प्रस्तुत किया गया। सभा का संचालन श्री एम ए नकवी के द्वारा किया गया।
दिन के प्रथम सत्र में शिविर निदेशक श्री बी दयाल जी ने सर्वे के आधार पर पढ़ाये जाने वाले शिविर पाठ्यक्रम की चर्चा की एवं दो प्रेरणादायी कहानियों – ‘एक मेढ़क की कहानी’ और ‘मेरा कुत्ता पानी पर चलता है’ का बड़ा ही सुन्दर एवं प्रभावशाली वाचन किया। इसके पश्चात श्री माणिक कुमार जी ने बराह साफ्टवेयर के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां अत्यन्त सरल पद्धति से प्रदान की जिसकी सभी प्रतिभागियों ने भूरि-भूरि प्रशंसा की।


(जिज्ञासा और अभिव्‍यक्‍ित)

भोजनावकाश के बाद दिन के दूसरे सत्र में निष्ठा समूह से श्रीमती गीता सबरवाल जी ने कविवर देव के पाठ सवैया और कवित्त पर अत्यन्त रुचिकर, आकर्षक व विद्वतापूर्ण शैली में आदर्श पाठ प्रस्तुत किया। तत्पश्चात संसाधिका श्रीमती मधुश्री शुक्ला जी ने आदर्श पाठ के रूप में शिल्प-सौन्दर्य के तत्वों पर प्रकाश डाला। इसी श्रंखला में संसाधिका श्रीमती अंजुम जी ने समास प्रकरण पर आदर्श पाठ प्रस्तुत किया। दिन के आखिरी चरण में विद्यालय के प्राचार्य व शिविर निदेशक जी ने वाच्य और पंचमाक्षरों के विषय में अत्यंत महत्वपूर्ण जानकारी बड़ी ही रोचक शैली में प्रदान की। – ईमान समूह का प्रतिवेदन

11 जून को प्रातःकालीन सभा का शुभारम्भ ‘ईमान’ समूह की प्रार्थना सभा से हुआ। प्रार्थना, प्रतिज्ञा, सुविचार और मुख्य समाचारों के उपरांत विशेष कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया। प्रार्थनासभा में पश्चात शिविर के सहायक निदेशक श्री रामजी गिरि द्वारा रूपरेखा से अवगत कराया गया। तत्पश्चात शिविर निदेशक श्री बी दयाल जी ने अपनी चिर परिचित शैली में प्रभावी शिक्षक के सामान्य गुणों की चर्चा की। इसके बाद सहायक निदेशक द्वारा गद्य की विभिन्न विधाऐं, गद्य रचनाओं के सोदाहरण प्रस्तुत की। इसके बाद प्रशिक्षणार्थियों ने संगणक कार्य किया। भोजनावकाश के बाद श्रीमती इंदिरा सिंह ने भाषा कौशल का विकास के विषय में प्रभावी विचार प्रकट किये। प्रतिभागियों को उत्साही बनाया। शिविर के प्रतिभागियों द्वारा आदर्श पाठ प्रस्तुत किये गये। उसमें सर्वश्री पीआर सिंह, डॉ वेदप्रकाश मिश्र तथा मनोज जी ने भाग लिया। अंत में शिविर निदेशक श्री बी दयाल जी ने र के प्रयोग की सम्पूर्ण जानकारी दी। – अहिंसा समूह का प्रतिवेदन
12 जून को शिविरार्थी श्री राम जी गिरि के निर्देशन में प्रातःकाल इलाहाबाद दर्शन को बस द्वारा निकल पड़े।


(चलो इलाहाबाद दर्शन को…)

सर्वप्रथम प्रशिक्षणार्थी पवित्र संगम स्थल पहुंचे। संगम स्नान कर सभी श्रद्धा, आस्था एवं विश्वास की त्रिस्तरीय ऊर्जा से परिपूर्ण होकर अक्षय वट, पातालपुरी पहुंचे।


(जाना था गंगा पार……)


(प्रसीद….प्रसीद प्रभो मन्‍मथारि)


(आस्‍था, धर्म और कला)

इसके बाद संगम से लगभग 55 किमी दूर सीतामढ़ी पहुंचे। वहां सीताजी की अत्यंत आकर्षक प्रतिमा तथा 108 फीट ऊंचे हनुमान जी की दुर्लभ प्रतिमा के दर्शन किये। स्थल बड़ा ही मनोरम और पवित्र था।


(भीम रूप धरि असुर संहारे, रामचन्‍द्र के काज संवारे)


(सत समा गया सत्‍ता के अंक विवर में /पर सीता की रवि की किरण अभेद तिमिर में //-‘सीतायन’ से, सीताजी के पाताल-प्रवेश की पंक्‍ितयां)

दोपहर बाद सभी प्रशिक्षणार्थी शिविर में वापस लौट आये। भोजनावकाश के बाद पुनः इलाहाबाद स्थित स्वराज भवन एवं आनंद भवन का भ्रमण किया।


(इलाहाबाद के ऐतिहासिक परिसर – अपने कैमरे में कैद….एक)


(इलाहाबाद के ऐतिहासिक परिसर – अपने कैमरे में कैद……दो)


(चित्र गवाह हैं इतिहास के)


(साथ-साथ बने एतिहासिक स्‍थलों के साक्षी्)

बहुत सारी स्मृतियां एवं छायाचित्रों साथ सभी शिक्षक- शिक्षिकाएं संसाधकगण सहित लौट आये और इस प्रकार एक और सफल दिवस का समापन हुआ। – न्याय समूह का प्रतिवेदन
13 जून को प्रातःकालीन सभा का शुभारम्भ अहिंसा समूह की प्रार्थना सभा से हुआ। प्रार्थना, प्रतिज्ञा, सुविचार और मुख्य समाचारों के उपरांत विशेष कार्यक्रम की प्रस्तुति में श्रीमती मधु मैडम ने अपने मधुर कंठ से एक कविता सुनाई जिसका विषय था- राष्ट्रीय एकता। सभा का संचालन श्री विनोद कुमार दुबे ने किया। तत्पश्चात शिविर निदेशक श्री बी दयाल ने अपनी चिरपरिचित शैली में प्रभावी शिक्षक के सामान्य गुणों की चर्चा की।
इसके बाद श्री गंगाधर जी द्वारा आदर्श पाठ-योजना की रोचक प्रस्तुति की गई। इसका विषय था – उपभोक्तावाद की संस्कृति। इसी मध्य शिक्षाधिकारी श्री के एस यादव का आगमन हुआ और उनका स्वागत शिविर निदेशक बी दयाल जी के द्वारा किया गया। शिक्षाअधिकारी श्री यादव से सभी का संक्षिप्त परिचय कराया गया इसके बाद उन्होंने अपने वक्तव्य में सभी को सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने उत्तम स्वास्थ्य और छात्रों के संतुलित विकास पर बल दिया। भोजनावकाश के बाद श्रीमती प्रमिला जैन ने मेघ आए, श्री नकवी जी ने सूरदास और राजीव सिंह द्वारा बच्चे काम पर जा रहे हैं कविता पर आदर्श पाठ-योजना प्रस्तुत की। अंतिम सत्र में संगणक शिक्षक श्री माणिकजी द्वारा पावरप्वाइंट का सैद्धांतिक और व्यावहारिक ज्ञान दिया। तत्पश्चात सभी प्रतिभागी सीखे हुए ज्ञान को स्वयं कम्प्यूटर चलाकर प्रयोग करने में लग गये। – सत्य समूह का प्रतिवेदन


(विद्वतजन की वाणी…)

14 जून को प्रातःकालीन सभा का शुभारम्भ न्याय समूह द्वारा प्रार्थना सभा से हुआ। इसके बाद प्रार्थना, प्रतिज्ञा, सुविचार और मुख्य समाचारों एवं विशेष कार्यक्रम की प्रस्तुति की गई। इसके बाद शिविर निदेशक श्री बी दयाल ने प्रमुख अतिथि डॉ सूर्य नारायण सिंह, प्रो. इलाहाबाद विवि, का स्वागत किया। मुख्य अतिथि प्रो सिंह ने हिन्दी गद्य की नवीन प्रवृत्तियां विषय पर उत्कृष्ट एवं विस्तृत व्याख्या की। इसके बाद शिविर के सह-निदेशक श्री रामजी गिरि ने सोद्देश्य ग्रहकार्य एवं उसकी अनिवार्यता पर प्रकाश डालते हुए संतुलित ग्रहकार्य देने की अनुशंसा की। इसी के साथ प्रथम सत्र समाप्त हुआ।
अपरान्ह सत्र में श्रीमती मधुराज पल खन्ना, राजेश कुमार शुक्ल, नाहरसिंह मीणा, शेषकुमारी सिंह एवं हरिशंकर द्विवेदी जी द्वारा आदर्श पाठ-योजना की उत्कृष्ट प्रस्तुति की गई। इसके बाद संगणक शिक्षक श्री माणिक जी ने प्रतिभागियों के बीच दो समूह बनाकर बराह सॉफ्टवेयर के प्रयोग के संदर्भ में खेल विधि द्वारा प्रतियोगिता आयोजित की। प्रतिभागियों ने बहुत ही उत्साह के साथ प्रतियोगिता में भाग लेते हुए अपनी दक्षता का प्रदर्शन किया। दोनों समूहों के अंक बराबर रहे। इसके बाद उत्साहवर्धन के लिए सभी प्रतिभागियों के बीच शिविर निदेशक श्री बी दयाल जी द्वारा मिष्ठान्न का वितरण किया गया। इस प्रकार प्रसन्नतापूर्वक दिवस की समाप्ति हुई। – निष्ठा समूह का प्रतिवेदन
15 जून को प्रातःकालीन सभा का शुभारम्भ सत्य समूह द्वारा प्रार्थना-सभा से हुआ। समूह द्वारा प्रार्थना, प्रतिज्ञा, सुविचार और मुख्य समाचारों एवं विशेष कार्यक्रम की प्रस्तुति की गई।
प्रथम सत्र की शुरूआत संसाधिका श्रीमती मधुश्री शुक्ल ने जीवन में खुश रहने के उपाय के जीवंत व्याख्यान से किया। डॉ रामकिशोर, प्रो. इलाहाबाद विवि, ने विशेष अतिथि के रूप में भाषा, शब्द, ध्वनि बोली धातु लिंग तथा स्त्री विमर्श आंदोलन आदि दुरूह विषयों पर अपनी विशद चर्चा रूपी व्याख्यान से प्रतिभागियों को भाषा-विज्ञान की सुरसरिता में अवगाहन कराते हुए सबका ज्ञान संवर्धन किया। संसाधिका श्रीमती इंदिरा सिंह ने अपठित गद्यांश पर अपने ज्ञान को वितरित किया। अपरान्हकालीन बेला में विभिन्न प्रतिभागियों ने अपने-अपने आदर्श पाठों को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। संगणक शिक्षक श्री माणिक कुमार जी ने सबको इंटरनेट की प्रारंभिक जानकारी दी।
सांन्ध्यकालीन बेला में काव्यगोष्ठी का शुभारंभ मां सरस्वती की वंदना से की गई। इसमें विभिन्न प्रतिभागियों के साथ संसाधिका श्रीमती मधुश्री शुक्ल, सह निदेशक श्री रामजीगिरि तथा निदेशक श्री बी दयाल जी ने अपनी काव्य-रचना कौशल का परिचय दिया। इस गोष्ठी की अध्यक्षता शिविर निदेशक श्री बी दयाल जी ने की। इसका अद्भुत संचालन कर श्री वेदप्रकाश मिश्र जी ने विलक्षण काव्य-शक्ति का परिचय दिया। -ईमान समूह का प्रतिवेदन


(विद्वतजन की वाणी…)

16 जून को प्रातःकालीन सभा का शुभारम्भ निष्ठा समूह द्वारा प्रार्थना सभा से हुआ। प्रार्थना प्रतिज्ञा सुविचार और मुख्य समाचारों के उपरांत विशेष कार्यक्रम की प्रस्तुति की गई जिसका विषय था – गांव की ओर लौटने की चाह। प्रतिवेदन की प्रस्तुति श्री एस एल पाण्डेय जी के द्वारा प्रस्तुत की गई।
इसके बाद अतिथि वक्ता डॉ लालसा यादव, प्रवक्ता, इलाहाबाद विवि के द्वारा स्त्री-विमर्श विषय पर बहुत ही उत्कृष्ट व्याख्यान की प्रस्तुति की गई। उन्होंने आदिकाल से आधुनिक युग की नारी तक की यात्रा बहुत ही मार्मिक ढंग से प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
तदुपरांत श्री ओ पी पाण्डेय द्वारा ‘हम पंछी उन्मुक्त गगन के’ श्रीमती शेषकुमारी सिंह द्वारा सूरदास तथा डॉ गीताकुमारी द्वारा कृष्णभक्ति पर रसखान विषय की आदर्श पाठ योजना प्रस्तुत की गई।


(दुतरफा सम्‍प्रेषण – कभी प्रश्‍न तो कभी गीत के रूप में)

भोजनावकाश उपरांत शिविर के सह-निदेशक श्री रामजी गिरि ने छात्रों की परीक्षा संबंधी दबाब, उनके कारण, उनको दूर करने की युक्तियां आदि पर गहन विचार प्रस्तुत कर अनेक समस्याओं का समाधान किया। तदुपरांत संसाधिका श्रीमती अंजुम ने हिन्दी के प्रति उदासीनता तथा उसके प्रति रुचि जगाने के उपाय विषय पर श्रेष्ठ व्याख्यान प्रस्तुत किया। अंत में कम्पयूटर संसाधक श्री आरके चौहान जी के द्वारा थिंक-क्वेस्ट की व्यापक जानकारी द्वारा प्रतिभागियों की समस्याओं का सहज निवारण किया। – अहिंसा समूह का प्रतिवेदन
17 जून को प्रातःकालीन सभा का शुभारम्भ ईमान समूह द्वारा प्रार्थना सभा से हुआ। प्रार्थना, प्रतिज्ञा, सुविचार और मुख्य समाचारों के उपरांत विशेष कार्यक्रम की प्रस्तुति की गई। इसके बाद निदेशक श्री बी दयाल जी ने विद्यार्थियों के जीवन विकास व मार्गदर्शन कैसे करना चाहिए इस विषय पर अतिमहत्वपूर्ण सुझाव दिये। इसके बाद प्रशिक्षार्णियों के द्वारा आदर्श पाठ योजना प्रस्तुत की गई। इस क्रम में श्रीमती सीमा, श्रीमती विद्या पाण्डेय, श्री आर आर पाण्डेय, श्रीमती जी आर किशोरी, श्रीमती अरुणिमा वर्मा के द्वारा आदर्श पाठ की प्रस्तुति की गई। तदुपरांत शिविर निदेशक श्री बी दयाल जी ने काव्य-शिक्षण के उद्देश्यों की विधि का स्पष्टीकरण किया। दूसरे सत्र में श्रीमती इंदिरा सिंह जी ने जीवन-कौशल के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। तदुपरांत श्री चौहान ने थिंक-क्वेस्ट प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी दी।

18 जून को प्रातःकालीन सभा शुभारम्भ अहिंसा समूह द्वारा प्रार्थना -सभा से हुआ। प्रार्थना, प्रतिज्ञा, सुविचार और मुख्य समाचारों के बाद विशेष कार्यक्रम की प्रस्तुति की गई। प्रतिवेदन की प्रस्तुति श्री प्रमोद सिंह द्वारा की गई।
निदेशक श्री बी दयाल जी ने विचार-गरल विषय पर महत्वपूर्ण व्याख्यान दिया। इसके बाद प्रशिक्षणार्थियों द्वारा आदर्श पाठयोजना प्रस्तुत की गई। श्रीमती रीना भट्टाचार्य, श्रीमती अरुणिमा वर्मा, श्रीमती पूनम शुक्ला के द्वारा आदर्श पाठ की प्रस्तुति की गई। तदुपरांत प्रशिक्षण के दौरान पठित पाठों पर आधारित परीक्षा का आयोजन किया गया।
दूसरे सत्र में निदेशक श्री बी दयाल ने वर्तनी एवं उच्चारण सम्बन्धी अशुद्धियों पर अभूतपूर्व व्याख्यान दिया। तदुपरांत श्री माणिक कुमार ने संगणक प्रयोग सम्बन्धी कठिनाईयों का निवारण किया। – सत्य समूह का प्रतिवेदन

19 जून को न्याय समूह द्वारा प्रार्थना-सभा का संचालन किया गया। प्रतिवेदन श्री ओमप्रकाश पाण्डे द्वारा प्रस्तुत किया गया। विशेष कार्यक्रम में श्रीमती शेषकुमारी सिंह द्वारा ‘इतनी शक्ति हमें देना दाता’ गीत का सुमधुर गायन किया गया। प्रार्थना-सभा के सभी कार्यक्रम प्रभावशाली रहे। शिविर निदेशक श्री बी दयाल जी ने गुण नामकरण एवं प्रभाव शब्द शक्तियां एवं उनसे ध्वनित अर्थ, समास- अर्थ महत्व तथा पहचान एवं उपवाक्य तथा उनके भेदों पर प्रकाश डालते हुए सारगर्भित परिचर्चा प्रस्तुत की गई। इसके उपरांत सम्पूर्ण प्रशिक्षण शिविर के दौरान पढ़ाए गए विषयों का पुनरावलोकन किया गया। भोजनोपरांत संगणक शिक्षक श्री माणिकजी ने थिंकक्वेस्ट पर प्रतिभागियों को उपयोगी जानकारी दी। अपरान्ह सत्र में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किये गए।


(मनीषियों से प्राप्‍त किये प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र)

सभी प्रतिभागियों ने सुव्यवस्थित शिविर प्रबंधन एवं बारह दिवसीय अनवरत चलने वाले ज्ञान यज्ञ की प्रशंसा की। विभिन्न संभागों से आए हुए प्रतिभागियों ने शिविर निदेशक श्री बी दयाल, सह निदेशक श्री रामजीगिरि एवं संसाधक त्रय – श्रीमती मधु शुक्ल, श्रीमती इन्दिरा सिंह एवं श्रीमती अंजुम के प्रति आभार व्यक्त किया।


( इलाहाबाद में, उद्यान में)

और चलते…..चलते…..

(संगम ……इस रूप में)

Advertisements