हिन्दी में कन्नड़ बोलेंगे, अम्मा से बतियायेंगे : संस्‍कृति-भूमि कर्नाटक से एक गीत

नवगीत : कर्नाटक की संस्कृति को यह नवगीत समर्पित है———

जिसके द्वारो चौक पुरा है, हम उसके घर जायेंगे।
बालों में जो फूल लगाती , उससे मिलकर आयेंगे।
बहुत दिनों तक रोटी खाई , अब हम चावल खायेंगे।
हिन्दी में कन्नड़ बोलेंगे, अम्मा से बतियायेंगे।

सांभर,उपमा, इडली, डोसा थाली में लगवायेंगे।
दीप जला जिसकी देहरी परए आसन वहीं जमायेंगे।
अब तो हम लुंगी पहनेंगेए माथे तिलक लगायेंगे
स्वामी शरणम् अइयप्पा का नारा खूब लगायेंगे।

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