अरविंद कुमार सिंह जी का अचानक मुरैना आगमन और निवास पर बिताये कुछ पल…….ग्वालियर में स्नातक-शिक्षक हिन्दी के आगामी सेवाकालीन प्रशिक्षण शिविर में अपने पाठ पर चर्चा के लिए डाॅ. रामकुमार सिंह ने किया पधारने का आग्रह

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मुरैना/23 अप्रेल 2016 / राज्यसभा चैनल के संपादक, संसदीय और कृषि मामलों के प्रभारी, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा  कृषि पत्रकारिता के देश के शिखर सम्मान चाौधरी चरण सिंह राष्ट्रीय कृषि पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित और सबसे बढ़कर हमारी पाठ्यपुस्तक कक्षा-8  वीं की ‘बसंत’ में ‘चिट्ठियों की अनूठी दुनियाँ’ पाठ के लेखक श्री अरविंद कुमार सिंह राज्यसभा चैनल की अपनी टीम के साथ देश में जलसंकट की पड़ताल करने निकले हैं। चम्बल, बुंदलेखण्ड से होते हुए महाराष्ट्र और कर्नाटक के सीमावर्ती वे इलाके जहाँ जलसंकट के कारण कृषि और किसानों की चिंता का साझा करना सारे देश की जरूरत बन गई है, हम सबकी ओर से अरविंद जी एक सोद्देश्य यायावर की तरह लम्बी यात्रा पर हैं। ग्वालियर-चम्बल से वे गुजरें और मुरैना में अपने आत्मीयजन को खबर न दें यह संभव ही नहीं, बस! फिर क्या था आज शाम लगभग 8ः30 बजे वे मुरैना में डाॅ. रामकुमार सिंह के निवास पर पधारे। आग्रह करने पर भोजन भी किया और बच्चों को शुभाशीष दिया। कुमारी वैष्णव और शैव ने संगीतमय रामकथा सुनाई तो अपनी प्रिय कलम उन्होंने पुरस्कार में दे दी। डाॅ. रामकुमार सिंह ने उनसे आग्रह किया यदि महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के कुछ इलाकों की यात्रा से लौटते समय अथवा जहां भी वे 18 से 29 मई 2016 में हों, कृपया ग्वालियर पधारें और स्नातकशिक्षक- हिन्दी के सेवाकालीन प्रशिक्षण में पधारें। डाॅ. सिंह ने पाठ्यक्रम निदेशक एवं प्राचार्य केन्द्रीय विद्यालय क्रमांक-1 सुश्री राजकुमारी निगम एवं समस्त दल की ओर से उन्हें इस हेतु अतिथि विद्वान के रूप में आमंत्रित किया।

 

मुरैना में 23 अप्रेल की शाम श्री अरविंद कुमार जी साथ ऐतिहासिक क्षण

इस दौरान वे पूरे समय के देश के जलसंकट, जल सहेजने से हम लोगों द्वारा किये गये परहेज के कारण उत्पन्न भयावह स्थिति के बारे में बताते रहे। किस तरह जल को परिवहन से दूर-दूर तक पहुंचाने की स्थितियां उत्पन्न हो गई हैं। पर्यावरण के प्रति हमारी उदासीनता और जल को महत्वहीन वस्तु की तरह बहाने के दुष्परिणामों के प्रति उनके स्वयं के देश भर के भ्रमण और जानकारियों ने हमारे रोंगटे खड़े कर दिये। इस दौरान उनके साथियों के अतिरिक्त निवास पर नईदुनिया-जागरण समूह के वन्यजीवन विशेषज्ञ पत्रकार शिवप्रताप सिंह भी उपस्थित रहे।
बातों ही बातों में उनसे चर्चा करने पर जानकारी मिली कि द्विवेदी युग के मूर्धन्य व्यक्तित्व आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी जी पर अभूतपूर्व, दुर्लभ और ऐतिहासिक अभिनंदन ग्रंथ को सामने लाने का महत् कार्य उनके द्वारा किस तरह सम्पन्न हो गया। उनका देश भर में भ्रमण पर रहना, सूक्ष्म-पर्यवेक्षण और जनमानस को कुछ न कुछ प्रदाय करने की उत्कट भावना के चलते ही यह संभव हुआ। गणेशशंकर विद्यार्थी पुरस्कार से लेकर राष्ट्रपति पुरस्कार और कृषि पत्रकारिता के देश के सर्वोच्च सम्मान से नवाजे जाने पर भी अरविंद कुमार जी में वही सादगी बरकार है जो दशकों में कभी नहीं बदली। बिल्कुल भारत रत्न उस्ताद बिसिमिल्लाह खान वाली सादगी। वे कभी पूर्वोत्तर के बोडो इलाके में होते हैं तो कभी तेलंगाना, कभी चम्बल तो कभी मराठवाड़ा। उनकी ग्रामीण चैपालों की श्रृंखला ने राज्यसभा ही नहीं महामहिम को भी अपना प्रभावित दर्शक बना लिया।
लगभग 10 बजे उनका काफिला ग्वालियर की ओर रवाना हो गया। इदम् ज्ञानम् सभाकक्ष उनकी उपस्थिति से धन्य हुआ। जयंत जी द्वारा सूचित करने पर उनका हृदय से आभार।

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2015 में अरविंद कुमार जी को पटना में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के 87वें समारोह में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने देश के कृषि पत्रकारिता के शिखर सम्मान, चौ.चरण सिंह राष्ट्रीय कृषि पत्रकारिता से  सम्मानित किया। यह पुरस्कार इलेक्ट्रानिक मीडिया श्रेणी में मिला । इस समारोह में बिहार और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल श्री केसरी नाथ त्रिपाठी, केंद्रीय कृषि मत्री श्री राधा मोहन सिंह, बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतिश कुमार और कृषि क्षेत्र की जानी मानी हस्तियां और कृषि वैज्ञानिक मौजूद थे।

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(भारतीय डाक विभाग की श्री अरविंद कुमार सिंह जी से विशेष आत्मीयता है। क्यों न हो, तकनीकी हमले के दौर में वे ही तो हैं जो चिट्ठियों की हामी भरते है। उनकी पुस्तक भारतीय डाक का अनुवाद भारतीय और विदेशी अनेक भाषाओं में हो चुका है। डाक टिकिट यहां दर्शनीय है।)

हिंदी जगत को एक अनूठी भेंट दी श्री अरविंद कुमार सिंह जी ने

आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी अभिनंदन ग्रंथ – 82 साल बाद फिर से प्रकाशन

हिंदी की इसी ऐतिहासिक धरोहर के लोकार्पण समारोह का आयोजन 20 सितंबर 2015 को

50 प्रवासी भवन, दीन दयाल उपाध्याय मार्ग, आईटीओ पर हुआ।

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राजधानी के प्रवासी भवन में ऐतिहासिक द्विवेदी अभिनंदन ग्रंथ के लोकार्पण के मौके पर साहित्यिक हस्तियों और पत्रकारों के साथ राजधानी में साहित्यप्रेमियों का समागम हुआ। आधुनिक हिंदी भाषा और साहित्य के निर्माता आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी के सम्मान में 1933 में प्रकाशित हिंदी का पहला अभिनंदन ग्रंथ दुर्लभ दशा को प्राप्त था। 83 सालों के बाद इस ग्रंथ को हूबहू पुनर्प्रकाशित करने का काम नेशनल बुक ट्स्ट, इंडिया ने किया । आज के संदर्भ में इस ग्रंथ की उपयोगिता पर मैनेजर पांडेय का एक सारगर्भित लेख भी है।

ग्रंथ के लोकार्पण और विमर्श के मौके पर साहित्य अकादमी के अध्यक्ष और विख्यात लेखक डॉ.विश्वनाथ प्रसाद तिवारी ने कहा कि आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी युग निर्माता और युग-प्रेरक थे। उन्होंने प्रेमचंद, मैथिलीशरण गुप्त जैसे लेखकों की रचनाओं में संशोधन किए। उन्होंने विभिन्न बोली-भाषा में विभाजित हो चुकी हिंदी को एक मानक रूप में ढालने का भी काम किया। वे केवल कहानी-कविता ही नहीं, बल्कि बाल साहित्य, विज्ञान और किसानों के लिए भी लिखते थे। हिंदी में प्रगतिशील चेतना की धारा का प्रारंभ द्विवेदी जी से ही हुआ।’’
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. मैनेजर पांडे ने इस ग्रंथ की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि, “यह भारतीय साहित्य का विश्वकोश है।” उन्होंने आचार्य जी की अर्थशास्त्र में रूचि व‘‘संपत्ति शास्त्र’’ के लेखन, उनकी महिला विमर्श और किसानों की समस्या पर लेखन की विस्तृत चर्चा की। इस ग्रंथ में उपयोग की गयीं दुर्लभ चित्रों को अपनी चर्चा का विषय बनाते हुए गांधीवादी चिंतक अनुपम मिश्र ने इन चित्रों में निहित सामाजिक पक्ष पर प्रकाश डाला। उन्होंने नंदलाल बोस की कृति ‘‘रूधिर’’ और अप्पा साहब की कृति ‘‘मोलभाव’’ पर विशेष ध्यान दिलाते हुए उनकी प्रासंगिकता को रेखांकित किया और कहा कि सकारात्मक कार्य करने वाले जो भी केन्द्र हैं उनका विकेन्द्रीकरण जरूरी है।

‘नीदरलैड से पधारीं प्रो. पुष्पिता अवस्थी ने कहा कि हिंदी सही मायने में उन घरों में ताकतवर है जहाँ पर भारतीय संस्कृति बसती है। नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया की निदेशक व असमिया में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित लेखिका डॉ. रीटा चौधरी ने कहा कि, यह अवसर न्यास के लिए बेहद गौरवपूर्ण व महत्वपूर्ण है कि हम इस अनूठे ग्रंथ के पुनर्प्रकाशन के कार्य से जुड़ पाए। ऐसी पुस्तकों का अनुवाद अन्य भारतीय भाषाओं में भी होना चाहिए। डॉ. चौधरी ने इस ग्रंथ की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि यह ग्रंथ हिंदी का ही नहीं बल्कि भारतीयता का ग्रंथ है और उस काल का भारत-दर्शन है।
चर्चा को आगे बढ़ाते हुए प्रख्यात पत्रकार रामबहादुर राय ने इन दिनों मुद्रित होने वाले नामी गिरामी लोगों के अभिनंदन ग्रंथों की चर्चा करते हुए कहा कि, “ऐसे ग्रंथों को लोग घर में रखने से परहेज करते हैं, लेकिन आचार्य द्विवेदी की स्मृति में प्रकाशित यह ग्रंथ हिंदी साहित्य,समाज, भाषा व ज्ञान का विमर्ष है न कि आचार्य द्विवेदी का प्रशंसा-ग्रंथ।” इस ग्रंथ की प्रासंगिकता व इसकी साहित्यिक महत्व को उल्लेखित करते हुए श्री राय ने यहां तक कहा कि, “यह ग्रंथ अपने आप में एक विश्व हिन्दी सम्मेलन है।”
कार्यक्रम के प्रारंभ में पत्रकार गौरव अवस्थी ने महावीर प्रसाद द्विवेदी से जुड़ी स्मृतियों को पावर प्वाइंट के माध्यम से प्रस्तुत किया। इस प्रेजेंटेशन यह बात उभर कर सामने आयी कि किस तरह से रायबरेली का आम आदमी, मजूदर व किसान भी आचार्य द्विवेदी जी के प्रति स्नेह-भाव रखते हैं।

वरिष्ठ पत्रकार और राइटर्स एंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष अरविंद कुमार सिंह ने इस ग्रंथ के प्रकाशन के लिए नेशनल बुक ट्रस्ट और रायबरेली की जनता को धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि द्विवेदी जी के संपादकीय और रेल जीवन पर भी काम करने की जरूरत है।

राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति, रायबरेली और राइटर्स एंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन, दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार और लेखक पंकज चतुर्वेदी ने किया।

सन् 1933 में काशी नागरी प्रचारिणी सभा द्वारा आचार्य द्विवेदी के सम्मान में प्रकाशित इस ग्रंथ में महात्मा गांधी के पत्र के साथ भारत रत्न भगवान दास, ग्रियर्सन, प्रेमंचद, सुमित्रानंदन पंत, काशीप्रसाद जायसवाल,सुभद्रा कुमारी चौहान से लेकर उस दौर की तमाम दिग्गज हस्तियों की रचनाएं और लेख है। वैसे तो इस ग्रंथ का नाम अभिनंदन ग्रंथ है और आचार्यजी के सम्मान में प्रकाशित हुआ लेकिन आज कल जैसी परिकल्पना से परे इसमें आचार्य जी का व्यक्तित्व-कृतित्व ही नहीं साहित्य की तमाम विधाओं पर गहन मंथन है।

इस समारोह में विख्यात लेखक रंजन जैदी, अर्चना राजहंस, योजना के संपादक ऋतेश, राइटर्स एंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन के महासचिव शिवेंद्र द्विवेदी, वरिष्ठ पत्रकार अरुण खरे, जय प्रकाश पांडेय, राकेश पांडेय, संपादक प्रदीप जैन, भाषा सहोदरी के संयोजक जयकांत मिश्रा, विख्यात कवि जय सिंह आर्य,देवेंद्र सिंह राजपूत,शाह आलम, विनय द्विवेदी, गणेश शंकर श्रीवास्तव, बरखा वर्षा, तरुण दवे समेत तमाम प्रमुख लोग मौजूद थे।

 

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अरविंद कुमार सिंह का पूर्ण सम्पर्क/पता यहाँ खासतौर पर ‘सर्जना’ के माध्यम से प्रस्तुत है:

अरविंद कुमार सिंह जी

वरिष्ठ संपादक,राज्य सभा टीवी, भारतीय संसद

अध्यक्ष, रायटर्स एंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन, दिल्ली

12 ए, गुरुद्वारा रकाबगंज रोड, संसद भवन के पास नयी दिल्ली 110001

फोन-9810082873, 9811180970

ईमेल-arvindksingh.rstv@gmail.com, arvind.singh@rstv.nic.in

 

 

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शिक्षा एवं प्रशिक्षण आंचलिक संस्थान चण्डीगढ़ में तीन दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम दिनांक 1 मई 2016 से

समाचार । चण्डीगढ़/ग्वालियर।  शिक्षा एवं प्रशिक्षण आंचलिक संस्थान चण्डीगढ़  में हिन्दी के सेवाकालीन प्रशिक्षण कार्य हेतु पाठ्यक्रम निदेशक, सम्बद्ध-निदेशक एवं संसाधकों का तीन दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम दिनांक 1 मई 2016 से 3 मई 2016 तक आयोजित किया जायेगा। शिक्षा एवं प्रशिक्षण आंचलिक संस्थान चण्डीगढत्र में उक्त उन्मुखीकरण कार्यक्रम की संयोजिका श्रीमती सुनीता गुसाईं, स्नातकोत्तर शिक्षक-हिन्दी ने बताया कि संस्थान के निदेशक श्री जगदीश मोहन रावत के कुशल दिशा-निर्देशन में उक्त उन्मुखीकरण सफलतापूर्वक सम्पादित होगा। उक्त उन्मुखीकरण कार्यक्रम में सम्मिलित होने जा रहे देश के विभिन्न हिस्सों के पाठ्यक्रम दलों के मध्य अपेक्षित पाठ्यसामग्री विकसित करने हेतु कार्य-विभाजन कर दिया गया है।

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श्री जगदीश मोहन रावत, निदेशक

शिक्षा एवं प्रशिक्षण आंचलिक संस्थान चण्डीगढ़

Tele: 0172- 2621364 & 2621302

zietchdacad@gmail.com

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श्रीमती सुनीता गुसाईं, स्नातकोत्तर शिक्षक-हिन्दी

शिक्षा एवं प्रशिक्षण आंचलिक संस्थान चण्डीगढ़

विस्तृत परिपत्र डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें। download ZIET circular

उक्त उन्मुखीकरण कार्यक्रम में भाग लेने हेतु केन्द्रीय विद्यालय क्रमांक-1 की प्राचार्य एवं पाठ्यक्रम निदेशक सुश्री राजकुमारी निगम, पाठ्यक्रम के सम्बद्ध निदेशक श्री एम.के.मीना, प्राचार्य केन्द्रीय विद्यालय छाबरा एवं संसाधकत्रय श्री धर्मेन्द्र भारद्वाज, डाॅ. अश्विनी शिवहरे, डाॅ. रामकुमार सिंह शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान चण्डीगढ़ जायेंगे।

सेवाकालीन प्रशिक्षण हेतु केविसं द्वारा कार्यक्रम जारी

समाचार। नई दिल्ली/ग्वालियर/चण्डीगढ़   केन्द्रीय विद्यालय संगठन द्वारा इस सत्र के लिए विभिन्न विषयों एवं पदों के शिक्षकों के सेवाकालीन प्रशिक्षण हेतु कार्यक्रम, स्थल एवं संसाधक दलों की घोषणा कर दी है।
विस्तृत परिपत्र पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
इसी क्रम में स्नातक शिक्षक हिन्दी के प्रशिक्षण कार्य हेतु भी विभिन्न संसाधक दलों की सूची जारी कर दी गई है। आंचलिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण केन्द्र चण्डीगढ़ अंतर्गत केन्द्रीय विद्यालय क्रमांक-1 ग्वालियर में दिनांक 18 मई 2016 से 29 मई 2016 तक आयोजित प्रशिक्षण के लिए निदेशक, सम्बद्ध-निदेशक एवं संसाधकत्रय के नामों नियत किये गये हैं। जो इस प्रकार हैं:

1-राजकुमारी निगम (निदेशक)

प्राचार्य केन्द्रीय विद्यालय क्रमांक-1, ग्वालियर, (प्रशिक्षण स्थल)

mob. 9425767050  

email  kv1gwl@gmail.com

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स्नातक शिक्षक हिन्दी के आयोजित होने जा रहे सेवाकालीन प्रशिक्षण शिविर की निदेशक एंव प्राचार्य राजकुमारी निगम देश के प्रारंभिक एवं प्रतिष्ठित केन्द्रीय विद्यालयों में गण्य केन्द्रीय विद्यालय क्रमांक-1 की प्राचार्य हैं। वे विषय विशेषज्ञ होने के साथ ही कुशल प्रशासनिक क्षमता से युक्त हैं। गत वर्ष आपके ही निर्देशन में स्नातकोत्तर शिक्षक हिन्दी का सेवाकालीन प्रशिक्षण सफलतापूर्वक संपादित हुआ जिसकी भूरि-भूरि प्रशंसा हुई। आप स्नातक शिक्षक हिन्दी के आयोजित होने जा रहे शिविर के 5 सदस्यीय मुख्य दल का निर्देशन कर रहीं हैं।

2-श्री एम.के. मीना (सम्बद्ध-निदेशक)
प्राचार्य, केन्द्रीय विद्यालय सीटीपीपी, छाबरा

mob.09414569343, 09549634244

email- mkmeena777@gmail.com

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श्री एम.के. मीना, पुरातात्विक महत्व और शौर्य की भूमि राजस्थान में स्थित केन्द्रीय विद्यालय सीटीपीपी छाबरा के प्राचार्य हैं। आप हिन्दी भाषा के विशेषज्ञ होने के साथ ही प्रशासनिक एवं अकादमिक गुणों से सम्पन्न व्यक्तित्व के धनी है। स्नातक-शिक्षक हिन्दी हेतु केन्द्रीय विद्यालय क्रमांक-1 ग्वालियर में प्रस्तावित सेवाकालीन प्रशिक्षण शिविर के सम्बद्ध निदेशक के रूप में आपको दायित्व सौंपा गया है। आप केन्द्रीय विद्यालय संगठन द्वारा प्रदत्त इस प्रकार के विभिन्न दायित्वों का सफलतापूर्वक निष्पादन करते रहे हैं।

3-श्री धमेन्द्र भारद्वाज (संसाधक )
स्नातकोत्तर शिक्षक-हिन्दी
केन्द्रीय विद्यालय तालबेहट

mob-9893000998

email-kvshindi@gmail.com

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हिन्दी विषय के संसाधन सम्पन्न विशेषज्ञ श्री भारद्वाज विज्ञानसम्मत प्रतिभा के भी अद्भुत धनी रहे हैं। आपने केन्द्रीय विद्यालय संगठन में दिनांक 26 मार्च 2009 से सेवा प्रारम्भ की है। संसाधक के रूप में गत वर्ष केन्द्रीय विद्यालय क्रमांक-1 ग्वालियर में आयोजित स्नातकोत्तर शिक्षक हिन्दी का सेवाकालीन प्रशिक्षण वर्तमान निदेशक सुश्री राजकुमारी निगम के कुशल मार्गदर्शन में बखूबी सम्पादित कर चुके हैं। सत्र 2014-15 में भी यह भूमिका आपने निभाकर पर्याप्त अनुभव अर्जित किया है।

4-डाॅ अश्विनी कुमार शिवहरे (संसाधक )

स्नातकोत्तर शिक्षक-हिन्दी,
केन्द्रीय विद्यालय क्रमांक5, ग्वालियर

मोबा. 7415598511

email-ashwinishivahare@yahoo.com

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डाॅ अश्विनी कुमार शिवहरे देश के प्रतिष्ठित इलाहाबाद विश्वविद्यालय से हिन्दी विषय में शोध-उपाधिधारक हैं। आप यूजीसी नेट द्वारा कनिष्ठ अनुसंधान अध्येता रहे हैं। आपका शोधकार्य एवं विशेषज्ञता हिन्दी के उपन्यासों में साहित्यिक मूल्यों की खोज-खबर है। दिनांक 27 जुलाई 2009 से केन्द्रीय विद्यालय संगठन में स्नातकोत्तर शिक्षक हिन्दी के रूप में सेवायें दे रहे डाॅ अश्विनी कुमारउपन्यास, कहानी सहित गद्य विधाओं में गहरी रुचि रखते हैं।
5- डाॅ. रामकुमार सिंह (संसाधक )

स्नातकोत्तर शिक्षक-हिन्दी,

केन्द्रीय विद्यालय मुरैना

mob-9301369969

email- singh.rk2009@rediffmail.com

web-www.ramkumarsingh.com

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अपनी नवाचारी परियोजना के लिए एनसीईआरटी नई दिल्ली का वर्ष 2012 का राष्ट्रीय पुरस्कार केन्द्रीय विद्यालय संगठन बैंगलौर संभाग अंतर्गत के.वि. दोणिमलै के लिए प्राप्त कर चुके डाॅ. रामकुमार सिंह युवा शिक्षाविद् के रूप में ख्यात हैं। हिन्दी महाकाव्यों में सामाजिक चेतना के अनुसंधान पर जीवाजी विश्वविद्यालय से वर्ष 2009 में डाॅक्टरेट उपाधि प्राप्त डाॅ. रामकुमार सिंह यूजीसी-नेट के साथ ही हिन्दी, राजनीति विज्ञान, संगीत, गणित, शिक्षा, व संगणक विज्ञान में उपाधिधारक हैं। ललित कला, एवं सम-सामयिक विषयों पर विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में स्तम्भ-लेखक रहे डाॅ. सिंह विभिन्न मंचों से कवि-सम्मेलनों में शामिल, समाचार-पत्रों के विशेष अभियानों और दूरदर्शन पर साहित्यिक परिचर्चाओं  में आमंत्रित, मंच-संचालक के रूप में ख्याति, बाल-मनोविज्ञान के कुशल अध्येता, दक्षिण भारतीय भाषाओं के उत्थान के लिए कार्यरत बहुभाषी कक्षा में भाषा-अध्यापन के विशेषज्ञ रहे हैं। थियेटर/नाटक लेखन में आपकी दक्षता है। । हिन्दी नाटक – ‘बेटी, सड़क और काले हाथ’ तथा ‘ब्रह्मराक्षस’ केन्द्रीय विद्यालय संगठन की राष्ट्रीय सामाजिक प्रदर्शनी में राष्ट्रीय स्तर पर ग्वालियर एवं चंडीगढ़ में प्रदर्शित हो चुके हैं। संगीत में गहरी रुचि, अनेक मंचों से गायन, वादन आदि में सम्मिलित। आप 7 फरवरी, 2009 से स्नातकोत्तर शिक्षक-हिन्दी के पद पर सेवारत
हैं, और जानकारी ‘सर्जना’ तथा ‘विकीपीडिया’ पर(प्रस्तुति सर्जना टीम)