अरविंद कुमार सिंह जी का अचानक मुरैना आगमन और निवास पर बिताये कुछ पल…….ग्वालियर में स्नातक-शिक्षक हिन्दी के आगामी सेवाकालीन प्रशिक्षण शिविर में अपने पाठ पर चर्चा के लिए डाॅ. रामकुमार सिंह ने किया पधारने का आग्रह

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मुरैना/23 अप्रेल 2016 / राज्यसभा चैनल के संपादक, संसदीय और कृषि मामलों के प्रभारी, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा  कृषि पत्रकारिता के देश के शिखर सम्मान चाौधरी चरण सिंह राष्ट्रीय कृषि पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित और सबसे बढ़कर हमारी पाठ्यपुस्तक कक्षा-8  वीं की ‘बसंत’ में ‘चिट्ठियों की अनूठी दुनियाँ’ पाठ के लेखक श्री अरविंद कुमार सिंह राज्यसभा चैनल की अपनी टीम के साथ देश में जलसंकट की पड़ताल करने निकले हैं। चम्बल, बुंदलेखण्ड से होते हुए महाराष्ट्र और कर्नाटक के सीमावर्ती वे इलाके जहाँ जलसंकट के कारण कृषि और किसानों की चिंता का साझा करना सारे देश की जरूरत बन गई है, हम सबकी ओर से अरविंद जी एक सोद्देश्य यायावर की तरह लम्बी यात्रा पर हैं। ग्वालियर-चम्बल से वे गुजरें और मुरैना में अपने आत्मीयजन को खबर न दें यह संभव ही नहीं, बस! फिर क्या था आज शाम लगभग 8ः30 बजे वे मुरैना में डाॅ. रामकुमार सिंह के निवास पर पधारे। आग्रह करने पर भोजन भी किया और बच्चों को शुभाशीष दिया। कुमारी वैष्णव और शैव ने संगीतमय रामकथा सुनाई तो अपनी प्रिय कलम उन्होंने पुरस्कार में दे दी। डाॅ. रामकुमार सिंह ने उनसे आग्रह किया यदि महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के कुछ इलाकों की यात्रा से लौटते समय अथवा जहां भी वे 18 से 29 मई 2016 में हों, कृपया ग्वालियर पधारें और स्नातकशिक्षक- हिन्दी के सेवाकालीन प्रशिक्षण में पधारें। डाॅ. सिंह ने पाठ्यक्रम निदेशक एवं प्राचार्य केन्द्रीय विद्यालय क्रमांक-1 सुश्री राजकुमारी निगम एवं समस्त दल की ओर से उन्हें इस हेतु अतिथि विद्वान के रूप में आमंत्रित किया।

 

मुरैना में 23 अप्रेल की शाम श्री अरविंद कुमार जी साथ ऐतिहासिक क्षण

इस दौरान वे पूरे समय के देश के जलसंकट, जल सहेजने से हम लोगों द्वारा किये गये परहेज के कारण उत्पन्न भयावह स्थिति के बारे में बताते रहे। किस तरह जल को परिवहन से दूर-दूर तक पहुंचाने की स्थितियां उत्पन्न हो गई हैं। पर्यावरण के प्रति हमारी उदासीनता और जल को महत्वहीन वस्तु की तरह बहाने के दुष्परिणामों के प्रति उनके स्वयं के देश भर के भ्रमण और जानकारियों ने हमारे रोंगटे खड़े कर दिये। इस दौरान उनके साथियों के अतिरिक्त निवास पर नईदुनिया-जागरण समूह के वन्यजीवन विशेषज्ञ पत्रकार शिवप्रताप सिंह भी उपस्थित रहे।
बातों ही बातों में उनसे चर्चा करने पर जानकारी मिली कि द्विवेदी युग के मूर्धन्य व्यक्तित्व आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी जी पर अभूतपूर्व, दुर्लभ और ऐतिहासिक अभिनंदन ग्रंथ को सामने लाने का महत् कार्य उनके द्वारा किस तरह सम्पन्न हो गया। उनका देश भर में भ्रमण पर रहना, सूक्ष्म-पर्यवेक्षण और जनमानस को कुछ न कुछ प्रदाय करने की उत्कट भावना के चलते ही यह संभव हुआ। गणेशशंकर विद्यार्थी पुरस्कार से लेकर राष्ट्रपति पुरस्कार और कृषि पत्रकारिता के देश के सर्वोच्च सम्मान से नवाजे जाने पर भी अरविंद कुमार जी में वही सादगी बरकार है जो दशकों में कभी नहीं बदली। बिल्कुल भारत रत्न उस्ताद बिसिमिल्लाह खान वाली सादगी। वे कभी पूर्वोत्तर के बोडो इलाके में होते हैं तो कभी तेलंगाना, कभी चम्बल तो कभी मराठवाड़ा। उनकी ग्रामीण चैपालों की श्रृंखला ने राज्यसभा ही नहीं महामहिम को भी अपना प्रभावित दर्शक बना लिया।
लगभग 10 बजे उनका काफिला ग्वालियर की ओर रवाना हो गया। इदम् ज्ञानम् सभाकक्ष उनकी उपस्थिति से धन्य हुआ। जयंत जी द्वारा सूचित करने पर उनका हृदय से आभार।

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2015 में अरविंद कुमार जी को पटना में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के 87वें समारोह में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने देश के कृषि पत्रकारिता के शिखर सम्मान, चौ.चरण सिंह राष्ट्रीय कृषि पत्रकारिता से  सम्मानित किया। यह पुरस्कार इलेक्ट्रानिक मीडिया श्रेणी में मिला । इस समारोह में बिहार और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल श्री केसरी नाथ त्रिपाठी, केंद्रीय कृषि मत्री श्री राधा मोहन सिंह, बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतिश कुमार और कृषि क्षेत्र की जानी मानी हस्तियां और कृषि वैज्ञानिक मौजूद थे।

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(भारतीय डाक विभाग की श्री अरविंद कुमार सिंह जी से विशेष आत्मीयता है। क्यों न हो, तकनीकी हमले के दौर में वे ही तो हैं जो चिट्ठियों की हामी भरते है। उनकी पुस्तक भारतीय डाक का अनुवाद भारतीय और विदेशी अनेक भाषाओं में हो चुका है। डाक टिकिट यहां दर्शनीय है।)

हिंदी जगत को एक अनूठी भेंट दी श्री अरविंद कुमार सिंह जी ने

आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी अभिनंदन ग्रंथ – 82 साल बाद फिर से प्रकाशन

हिंदी की इसी ऐतिहासिक धरोहर के लोकार्पण समारोह का आयोजन 20 सितंबर 2015 को

50 प्रवासी भवन, दीन दयाल उपाध्याय मार्ग, आईटीओ पर हुआ।

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राजधानी के प्रवासी भवन में ऐतिहासिक द्विवेदी अभिनंदन ग्रंथ के लोकार्पण के मौके पर साहित्यिक हस्तियों और पत्रकारों के साथ राजधानी में साहित्यप्रेमियों का समागम हुआ। आधुनिक हिंदी भाषा और साहित्य के निर्माता आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी के सम्मान में 1933 में प्रकाशित हिंदी का पहला अभिनंदन ग्रंथ दुर्लभ दशा को प्राप्त था। 83 सालों के बाद इस ग्रंथ को हूबहू पुनर्प्रकाशित करने का काम नेशनल बुक ट्स्ट, इंडिया ने किया । आज के संदर्भ में इस ग्रंथ की उपयोगिता पर मैनेजर पांडेय का एक सारगर्भित लेख भी है।

ग्रंथ के लोकार्पण और विमर्श के मौके पर साहित्य अकादमी के अध्यक्ष और विख्यात लेखक डॉ.विश्वनाथ प्रसाद तिवारी ने कहा कि आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी युग निर्माता और युग-प्रेरक थे। उन्होंने प्रेमचंद, मैथिलीशरण गुप्त जैसे लेखकों की रचनाओं में संशोधन किए। उन्होंने विभिन्न बोली-भाषा में विभाजित हो चुकी हिंदी को एक मानक रूप में ढालने का भी काम किया। वे केवल कहानी-कविता ही नहीं, बल्कि बाल साहित्य, विज्ञान और किसानों के लिए भी लिखते थे। हिंदी में प्रगतिशील चेतना की धारा का प्रारंभ द्विवेदी जी से ही हुआ।’’
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. मैनेजर पांडे ने इस ग्रंथ की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि, “यह भारतीय साहित्य का विश्वकोश है।” उन्होंने आचार्य जी की अर्थशास्त्र में रूचि व‘‘संपत्ति शास्त्र’’ के लेखन, उनकी महिला विमर्श और किसानों की समस्या पर लेखन की विस्तृत चर्चा की। इस ग्रंथ में उपयोग की गयीं दुर्लभ चित्रों को अपनी चर्चा का विषय बनाते हुए गांधीवादी चिंतक अनुपम मिश्र ने इन चित्रों में निहित सामाजिक पक्ष पर प्रकाश डाला। उन्होंने नंदलाल बोस की कृति ‘‘रूधिर’’ और अप्पा साहब की कृति ‘‘मोलभाव’’ पर विशेष ध्यान दिलाते हुए उनकी प्रासंगिकता को रेखांकित किया और कहा कि सकारात्मक कार्य करने वाले जो भी केन्द्र हैं उनका विकेन्द्रीकरण जरूरी है।

‘नीदरलैड से पधारीं प्रो. पुष्पिता अवस्थी ने कहा कि हिंदी सही मायने में उन घरों में ताकतवर है जहाँ पर भारतीय संस्कृति बसती है। नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया की निदेशक व असमिया में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित लेखिका डॉ. रीटा चौधरी ने कहा कि, यह अवसर न्यास के लिए बेहद गौरवपूर्ण व महत्वपूर्ण है कि हम इस अनूठे ग्रंथ के पुनर्प्रकाशन के कार्य से जुड़ पाए। ऐसी पुस्तकों का अनुवाद अन्य भारतीय भाषाओं में भी होना चाहिए। डॉ. चौधरी ने इस ग्रंथ की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि यह ग्रंथ हिंदी का ही नहीं बल्कि भारतीयता का ग्रंथ है और उस काल का भारत-दर्शन है।
चर्चा को आगे बढ़ाते हुए प्रख्यात पत्रकार रामबहादुर राय ने इन दिनों मुद्रित होने वाले नामी गिरामी लोगों के अभिनंदन ग्रंथों की चर्चा करते हुए कहा कि, “ऐसे ग्रंथों को लोग घर में रखने से परहेज करते हैं, लेकिन आचार्य द्विवेदी की स्मृति में प्रकाशित यह ग्रंथ हिंदी साहित्य,समाज, भाषा व ज्ञान का विमर्ष है न कि आचार्य द्विवेदी का प्रशंसा-ग्रंथ।” इस ग्रंथ की प्रासंगिकता व इसकी साहित्यिक महत्व को उल्लेखित करते हुए श्री राय ने यहां तक कहा कि, “यह ग्रंथ अपने आप में एक विश्व हिन्दी सम्मेलन है।”
कार्यक्रम के प्रारंभ में पत्रकार गौरव अवस्थी ने महावीर प्रसाद द्विवेदी से जुड़ी स्मृतियों को पावर प्वाइंट के माध्यम से प्रस्तुत किया। इस प्रेजेंटेशन यह बात उभर कर सामने आयी कि किस तरह से रायबरेली का आम आदमी, मजूदर व किसान भी आचार्य द्विवेदी जी के प्रति स्नेह-भाव रखते हैं।

वरिष्ठ पत्रकार और राइटर्स एंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष अरविंद कुमार सिंह ने इस ग्रंथ के प्रकाशन के लिए नेशनल बुक ट्रस्ट और रायबरेली की जनता को धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि द्विवेदी जी के संपादकीय और रेल जीवन पर भी काम करने की जरूरत है।

राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति, रायबरेली और राइटर्स एंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन, दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार और लेखक पंकज चतुर्वेदी ने किया।

सन् 1933 में काशी नागरी प्रचारिणी सभा द्वारा आचार्य द्विवेदी के सम्मान में प्रकाशित इस ग्रंथ में महात्मा गांधी के पत्र के साथ भारत रत्न भगवान दास, ग्रियर्सन, प्रेमंचद, सुमित्रानंदन पंत, काशीप्रसाद जायसवाल,सुभद्रा कुमारी चौहान से लेकर उस दौर की तमाम दिग्गज हस्तियों की रचनाएं और लेख है। वैसे तो इस ग्रंथ का नाम अभिनंदन ग्रंथ है और आचार्यजी के सम्मान में प्रकाशित हुआ लेकिन आज कल जैसी परिकल्पना से परे इसमें आचार्य जी का व्यक्तित्व-कृतित्व ही नहीं साहित्य की तमाम विधाओं पर गहन मंथन है।

इस समारोह में विख्यात लेखक रंजन जैदी, अर्चना राजहंस, योजना के संपादक ऋतेश, राइटर्स एंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन के महासचिव शिवेंद्र द्विवेदी, वरिष्ठ पत्रकार अरुण खरे, जय प्रकाश पांडेय, राकेश पांडेय, संपादक प्रदीप जैन, भाषा सहोदरी के संयोजक जयकांत मिश्रा, विख्यात कवि जय सिंह आर्य,देवेंद्र सिंह राजपूत,शाह आलम, विनय द्विवेदी, गणेश शंकर श्रीवास्तव, बरखा वर्षा, तरुण दवे समेत तमाम प्रमुख लोग मौजूद थे।

 

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अरविंद कुमार सिंह का पूर्ण सम्पर्क/पता यहाँ खासतौर पर ‘सर्जना’ के माध्यम से प्रस्तुत है:

अरविंद कुमार सिंह जी

वरिष्ठ संपादक,राज्य सभा टीवी, भारतीय संसद

अध्यक्ष, रायटर्स एंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन, दिल्ली

12 ए, गुरुद्वारा रकाबगंज रोड, संसद भवन के पास नयी दिल्ली 110001

फोन-9810082873, 9811180970

ईमेल-arvindksingh.rstv@gmail.com, arvind.singh@rstv.nic.in

 

 

‘‘कुंई जैसी गहराई मिल जाएगी’’: अनुपम मिश्र जी से रूबरू//जब अनुपम मिश्र जी ने पढ़ाया अपना पाठ ‘राजस्थान की रजत बूंदें’

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सर्जना, 22 फरवरी, 2013। कक्षा 11 वीं के मेरे विद्यार्थियों के लिए यह सुखद और उत्साहजनक है कि स्वयं अनुपम मिश्र जी ने न केवल मेरे साथ उन जिज्ञासाओं पर बातचीत की जो आप लोग कक्षा में पूछा करते हैं बल्कि लगभग 20 मिनिट तक उन्होनें खुद रेखाचित्र बनाकर उस पाठ की बारीकियों को समझाया।
22 फरवरी की शाम ग्वालियर की एक पहाड़ी पर स्थित पर्यावरण-मित्र उपनगर ‘विवेकानंद नीडम’ के शांत और सुरम्य वातावरण में पत्रकार, संस्कृतिकर्मी एवं शिक्षाविद् आदरणीय श्री जयंत तोमर तथा साथी श्री अरविंद जी के साथ मैं जा पहुंचा। जयंत जी ने एक दिन पूर्व बताया था कि अनुपम जी ग्वालियर आ रहे हैं, और चूंकि ‘राजस्थान की रजत बूंदें’ मैं कक्षा 11 वीं के विद्यार्थियों को पढ़ाता हूं, तो विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं को साथ समेटे श्री अनुपम जी से भेंट और अगर हो सके तो चर्चा की उम्मीद लिये जा पहुंचा।
हम लोग जब पहुंचे तो अनुपम जी की महत्वपूर्ण बैठक चल रही थी। इस दरम्‍यान नीडम के परिवेश और औषधीय हवाओं का आनंद लेते रहे। बैठक के बाद जैसे ही अनुपम जी बाहर निकले, जयंत जी ने मेरी उनसे शैक्षणिक भेंट-परियोजना के बारे में बता दिया। आदरणीय अनुपम जी की उदारता देखिये कि तत्काल स्थल का चुनाव कर बैठ गए और निकाल ली अपने थेले से काली कलम, लगे रजत बूंदों का मर्म हमें समझाने। पाठ के बारे में जो भी सवालात मैं पूछ रहा था, बड़ी तल्लीनता से वे हमें बारीकियां समझाते जा रहे थे। सवाल कुंईयों की वैज्ञानिक संरचना का भी था और चेजारो की कार्यप्रणाली का। वे चेजारो जो कई वर्षों की परम्परा से कुंईयों के निर्माता बने, उनके वर्तमान जीवन के बारे में पूछा। अनुपम जी उतने ही खरेपन के साथ पाठ को समझा रहे थे जितने खरेपन से वे तालाबों के लिए अपना जीवन समर्पित कर चुके हैं।
ये बहुमूल्य समय हमने लिया उस पाठ को आप तक ठीक से पहुंचाने के लिए जिसके बारे में एनसीईआरटी की आपकी पुस्तक का संपादक मंडल लिखता है: – ‘‘राजस्थान की रजत बूँदें। यह रचना एक राज्य विशेष राजस्थान की जल समस्या का समाधान मात्र नहीं है। यह जमीन की अतल गहराइयों में जीवन की पहचान है।यह रचना धीरे-धीरे भाषा की एक ऐसी दुनिया में ले जाती है जो कविता नहीं है,कहानी नहीं है, पर पानी की हर आहट की कलात्मक अभिव्यक्ति है। भाषा में संगीतमय गद्य की पहचान है। इस पहचान से विद्यार्थियों का ताल मिले, यह वितान की उपलब्धि होगी।’’
जब हमने अनुपम जी से आप सबके लिए संदेश मांगा तो उन्होने लिखा कि – ‘‘अपने समाज में, गांव में शहर में सबके साथ मिलकर अपने आसपास की चीजों को समझने की कोशिश करो। सब जगह कुंई जैसी गहराई मिल जायेगी। शोध नहीं श्रृद्धा रखो समाज पर।‘‘
वापस आते वक्त मैं सोच रहा था कि कुछेक व्यक्तित्वों में ही शायद ये गहराई होती है जैसे कि अनुपम जी….।
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पाठ के लेखक और तुम्हारे शिक्षक की परस्पर भेंट: वाह! क्या बात है/खोज-खबर: पाठ से आगे

कक्षा-8 वीं के प्यारे विद्यार्थियो,
तुम लोग तो जानते ही हो कि हर पाठ से आगे जाकर हम खुले आकाश के नीचे कुछ खोज-खबर लेने में जुट जाते हैं। तुमने कई बार लेखकों-कवियों के बारे में पूछ-पूछकर हमें भी अपना-सा जिज्ञासु बना ही दिया। तो लो हमने भी ठान लिया कि समय-समय पर उन तमाम सवालों से आगे जाकर उन्हीं लेखकों-कवियों से तुम्हारा सामना करायेंगे या तुम्हारे प्रतिनिधि बनकर वो सब जानने की कोशिश करेंगे जो तुम लोग हम शिक्षकों से पूछा करते हो।
इसी टोह में हमने मुलाकात की तुम्हारे प्रिय पाठ ‘चिट्ठियों की अनूठी दुनियाँ’ के लेखक श्री अरविंद कुमार सिंह जी से।
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पहले बताते हैं कि हमें वे कौन-सी बातें उन्होंने बताईं जो तुम्हारे पाठ से आगे की हैं और जो तुम्हारी आंखों में चमक पैदा कर देंगी।
पहली बात उनकी मूल पुस्तक नेशनल बुक ट्रस्ट से अंग्रेजी में प्रकाशित है ‘द हिस्ट्री ऑफ इंडियन पोस्ट’ उसी के एक अध्याय का यह पाठ तुम्हारी पुस्तक बसंत भाग-तीन में संकलित है। उन्होने अपने बैग से वह पुस्तक मुझे दिखाई। अच्छा लगा। उन्होने एक बात और बताई कि ‘द पोस्टमेन’ अध्याय डाकिया के नाम से तुम्हें आगे किताबों में पढने को मिलेगा। उन्होंने एक बात और बताई कि समुद्री मार्ग से पुराने समय में जो पत्राचार होता था वे उस पर खोजबीन कर रहे हैं। उस पर भी किताब लिख रहे हैं।
अब एक और सबसे मजेदार बात कि हमने उनसे दो ऐसे प्रश्न पूछे जो आप हमसे पूछते हो कि लेखक को कैसे पता चला होगा कि भारत में प्रतिदिन ‘‘साढे चार करोड चिट्ठियां डाक में डाली जाती हैं’’???? मैंने उन्हीं से पूछ लिया । उन्होंने बताया कि डाक भवन, नई दिल्ली के जो उच्च अधिकारी हैं उनके माध्यम से यह जानकारी उन्हें मिली जो उन्होंने शोध कर अपनी पुस्तक में लिखी है।
आओ, अब मैं तुम्हें उनका संक्षिप्त परिचय देता हूँ। जो तुम्हारी पुस्तक में नहीं है। 7 अप्रेल सन् 1965 को उत्तरप्रदेश के बस्ती जिले में जन्मे श्री अरविंद जी इलाहाबाद विश्वविद्यालय से कला स्नातक हैं। वे बीते करीब 30 सालों से हिन्दी पत्रकारिता व लेखन से जुड़े हैं। वे जनसत्ता एक्सप्रेस, चौथी दुनिया, अमर-उजाला, इंडियन एक्सप्रेस में कार्य के साथ-साथ हरिभूमि के दिल्ली संस्करण में संपादक भी रहे हैं। वर्तमान में वे राज्यसभा चैनल के विशेष संवाददाता भी हैं। साथ ही रेलवे बोर्ड के परामर्शदाता भी हैं। वे महामहिम राष्ट्रपति जी द्वारा सम्मानित, हिन्दी अकादमी दिल्ली द्वारा हिन्दी पत्रकारिता में योगदान के लिए पुरस्कृत होने के साथ-साथ अनेके प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं।
हाँ, चलते चलते डॉ जयंत जी का आभार जिन्होनें मुझे उनका मित्र बनाया।
अगली बार नयी खोज-खबर के साथ,
आपका
राम सर
देखिये उन्‍होंने हमारी पोस्‍ट को चेहरे की किताब यानी कि फेसबुक पर बांटा, नई जानकारी भी दी, अपने बारे में;;;;;; और तुम लोगों से मिलने का वायदा भी किया है।

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बेजोड लता जी और बेबी हालदार की आत्‍मकथा

वितान – कक्षा: 11 वीं : प्रश्नोत्तर-संचयन
पाठ: भारतीय गायिकाओं में बेजोड़: लता मंगेशकर

प्रश्न 1. लय कितने प्रकार की होती है?
उत्तर: लय तीन प्रकार की होती है-
क- बिलंबित लय (धीमी) ख- मध्य लय (बीच की) ग- द्रुत लय (तेज)
प्रश्न 2. लेखक ने शास्त्रीय गायकों पर क्या आरोप लगाया है? उन्होंने शास्त्रीय गायकों को क्या सुझाव दिया है?
उत्तर: . लेखक ने शास्त्रीय गायकों पर आरोप लगाया है कि उन्होंने शास्त्र-शुद्धता के कर्मकांड को आवश्यकता से अधिक महत्व दे रखा है। लेखक ने उन्हें सुझाव दिया है कि केवल शास्त्र शुद्धता और नीरस गाना गाने की बजाय उन्हें सुरीला और भावपूर्ण गाना चाहिए।
प्रश्न 3. चित्रपट संगीत के विकसित होने का क्या कारण है?
उत्तर:- चित्रपट संगीत आम आदमी की समझ में आ रहा है। इसके माध्यम से लोग अपनी संस्कृति से परिचित हो रहे हैं। यह विभिन्नता में एकता का प्रचार कर रहा है। फलस्वरूप चित्रपट संगीत दिनोंदिन अधिकाधिक विकसित होता जा रहा है।
प्रश्न 4. लता मंगेशकर के गायन की किन्हीं तीन विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
क- शास्त्रीय व चित्रपट संगीत का ज्ञान – लता मंगेशकर को शास्त्रीय तथा चित्रपट संगीत दोनों प्रकार के संगीत का ज्ञान है। उनके संगीत में शास्त्रीय आधार का अभाव नहीं रहता। चित्रपट संगीत की लोकप्रियता का मूल ही उसमें शास्त्रीय संगीत का मेल है।
ख- स्वरों में निर्मलता उनके स्वरों में कोमलता और मुग्धता है। लताजी का जीवन के प्रति जो दृष्टिकोंण है, वही उनके गायन की निर्मलता में झलकता है।
ग- गायकी में गानपन – लता की लोकप्रियता का मुख्य आधार उनके गानों का गायन है। उनकी हृदय की भावुकता उनकी गायकी में ‘गानपन’ का अनूठा भाव श्रोता को मस्त बना देता है।
प्रश्न 5: शास्त्रीय संगीत और चित्रपट संगीत के तीन अंतर बताइये?
उत्तर: शास्त्रीय संगीत –
क- रागों की प्रधानता होती है।
ख- ताल परिष्कृत रूप में पाया जाता है।
ग- स्थायीभाव गंभीरता है।
चित्रपट संगीत –
क- गानपन की प्रधानता होता है।
ख- आधे तालों का उपयोग किया जाता है।
ग- स्थायीभाव दु्रत लय और चपलता होती है।
पाठ का नाम: आलो-आँधारि

(तातुश के साथ)

प्रश्न 1: बेबी हालदार को अपने पति का घर क्यों छोड़ना पड़ा?
उत्तर – बेबी हालदार का विवाह अपने से दुगुनी उम्र के व्यक्ति से हुआ बारह-तेरह वर्ष तक पति के साथ उसकी ज्यादतियों को सहन करती रहीं। उसकी ज्यादतियों से परेशान होकर तीनों बच्चों सहित उसने पति का घर छोड़ दिया।
प्रश्न 2. लेखिका को लेखन के लिए किन-किन लोगों ने उत्साहित किया ?
उत्तर- लेखिका को लेखन के लिए सबसे पहले तातुश ने प्रेरित किया । उन्होनें ही उसका परिचय कोलकत्ता और दिल्ली के लोगों से करवाया । इसके अतिरिक्त कोलकत्ता के जेठू , आनंद , अध्यापापिका शर्मिला आदि पत्र लिखकर उसे प्रोत्साहित करते थे ।
प्रश्न 3 – पति का घर छोड़ने के बाद लेखिकाय को क्या चिंता सताने लगी ?
उत्तर- पति का घर छोड़कर लेखिका अपने बच्चों के साथ किराये के मकान में रहने लगी । उस समय उसे यह चिंता सताने लगी कि यदि काम नें मिला तो मकान का किराया कैसे देंगी ? कैसे अपने बच्चों को पालेगी-पोसेगी ? इसी चिंता में डूबी वह अपने बच्चों को साथ लेकर काम ढूॅंढने के लिए एक घर से दूसरे घर जाती लेकिन काम नहीं रहा था ।
प्रश्न 4 – तातुश के घर बेबी सुखी थी , फिर भी उदास हो जाती थी । क्यों ?
उत्त्र- तातुश के घर पर बेबी को बहुत सुविधाए व सहायता मिली परन्तु उसे अपने बड़े लड़के की याद आती थी । उसकी सूचना दो महीने से नहीं आई थी । जो लोग उसके लड़के को लेकर गए थे , उनके दिए पते पर वह लड़का नहीं रहता था । उसने कुछ लोगों से पूछा तो किसी ने संतोषजनक उत्तर नहीं दिया । इसलिए वह उदास हो जाती थी ।
प्रश्न 5- तातुश ने लेखिका को पार्क में जाने का सुझाव क्यों दिया था ?
उत्तर: तातुश अपने छोटे पुत्र अर्जुन दा के साथ रहते थे। घर में उसके दो मित्र भी वहांँ रहने के लिए आ गए थे , उनके आने से लेखिका का काम बढ़ गया था। वह सारा दिन घर के कार्यों में व्यस्त रहती थी। घर के लोगों के अच्छे व्यवहार के कारण वह प्रत्येक कार्य को खुशी-खुशी करती थी। तातुश ने उसके कार्य की व्यस्तता को देखते हुए उसे पार्क में अपने बच्चों के साथ जाने का सुझाव दिया, ताकि उसका तथा उसके बच्चों का मनोरंजन हो सके।

-सौजन्‍य – स्‍नातकोत्‍तर हिन्‍दी शिक्षक प्रशिक्षण, वाराणसी

अभिव्‍यक्‍ित और माध्‍यम : कक्षा 11 वीं/12वीं के लिए उपयोगी

जनसंचार से सम्बंधित 81 प्रश्न

प्रश्न संचार शब्द की उत्पत्ति किस शब्द से हुई है
उत्तर: संचार शब्द की उत्पत्ति चर शब्द से हुई है। चर का अर्थ है – चलना या एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचना।
प्रश्न संचार से क्या अभिप्राय है
उत्तर: संचार दो या दो से अधिक व्यक्तियों के बीच सूचनाओं विचारों और भावनाओं का आदान-प्रदान है।
प्रश्न संचार और जनसंचार के विविध माध्यम कौन-कौन से हैं
उत्तर: टेलीफोन इंटरनेट फैक्स समाचार-पत्र रेडियो टेलीविजन और सिनेमा आदि।
प्रश्न विल्वर सैम के अनुसार संचार की क्या परिभाषा है?
उत्तर: विल्वन सैम के अनुसार संचार अनुभवों की साझेदारी है।
प्रश्न संचार के तत्त्व कौन-कौन से हैं
उत्तर: स्रोत संदेश शोर डीकोडिंग फीडबैक आदि।
प्रश्न संचार के प्रकार कौन-कौन से हैं
उत्तर: मौखिक और अमौखिक संचार अंतःवैयक्तिक संचार अंतर-वैयक्तिक संचार समूह समूह संचार जनसंचार आदि।
प्रश्न संचार प्रक्रिया की शुरूआत कब होती है
उत्तर: जब स्रोत या संचारक एक उद्देश्य के साथ अपने किसी विचार संदेश या भावना को किसी और तक पहुँचाना चाहता है तब संचार की शुरूआत होती है।
प्रश्न सफल संचार के लिए क्या आवश्यक है
उत्तर: सफल संचार के लिए आवश्यक है कि संदेशग्रहीता भी भाषा यानी उस कोड से परिचित हो जिसमें अपना संदेश भेज रहे हैं।
प्रश्न डीकोडिंग का क्या अर्थ है
उत्तर: डीकोडिंग का अर्थ है – प्राप्त संदेशों में निहित अर्थ को समझने की कोशिश।
प्रश्न फीडबैक से हमें क्या पता चलता है
उत्तर: फीडबैक से हमें पता चलता है कि संचारक ने जिस अर्थ के साथ संदेश भेजा था वह उसी अर्थ में प्राप्तकर्ता को मिला है।
प्रश्न शोरसे क्या अभिप्राय है
उत्तर: संचार-प्रक्रिया में कई प्रकार की बाधाएँ आती हैं इन बाधाओं को शोर कहते हैं।
प्रश्न सांकेतिक संचार किसे कहते हैं
उत्तर: संकेतों द्वारा विचारों का आदान-प्रदान करना ही सांकेतिक संचार कहलाता है।
प्रश्न अंतर-वैयक्तिक संचार से आप क्या समझते हैं
उत्तर: जब दो व्यक्ति आपस में आमने-सामने संचार करते हैं तो इसे अंतर-वैयक्तिक संचार कहते हैं।
प्रश्न साक्षात्कार में कौन-से कौशल की परख होती है
उत्तर: साक्षात्कार में अंतर-वैयक्तिक कौशल की परख होती है।
प्रश्न जनसंचार की किसी एक विशेषता को लिखिए।
उत्तर: जनसंचार माध्यमों के जरिए प्रकाशित या प्रसारित संदेशों की प्रकृति सार्वजनिक होती है
प्रश्न संचार के प्रमुख कार्य बताइए।
उत्तर: प्राप्ति नियंत्रण सूचना अभिव्यक्ति सामाजिक सम्पर्क तथा समस्या-समाधान प्रतिक्रिया आदि।
प्रश्न जनसंचार के प्रमुख प्रमुख कार्यों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: सूचना देना शिक्षित करना मनोरंजन करना, एजेंडा तय करना निगरानी करना तथा विचार-विमर्श के लिए मंच उपलब्ध कराना।
प्रश्न संपादकीय विभाग का क्या कार्य है?
उत्तर: खबरों लेखों तथा फीचरों को व्यवस्थित ढंग से संपादकीय करने का कार्य संपादकीय विभाग का होता है
प्रश्न उदंत मार्तण्ड का प्रकाशन कब और कहाँ हुआ
उत्तर: साप्ताहिक पत्र उदंत मार्तण्ड 1826 ई. में कोलकाता से जुगल किशोर के संपादकत्व में प्रकाशित हुआ।
प्रश्न भारत में पत्रकारिता की शुरूआत कब हुई
उत्तर : भारत में पत्रकारिता की शुरूआत सन् 1780 ई में जेम्स ऑगस्ट हिक्की के बंगाल-गजट से हुई।
प्रश्न आजादी-पूर्व के प्रमुख पत्रकारों के नाम बताइए।
उत्तर: गणेश शंकर विद्यार्थी माखनलाल चतुर्वेदी महावीर प्रसाद द्विवेदी प्रतापनारायण मिश्र शिवपूजन सहाय रामवृक्ष बेनीपुरी बालमुकुन्द गुप्त आदि।
प्रश्न आजादी पूर्व की कुछ प्रमुख पत्र-पत्रिकाओ के नाम बताइए।
उत्तर: केसरी हिन्दुस्तान सरस्वती हंस कर्मवीर प्रताप आज विशाल भारत आदि।
प्रश्न रेडियो का आविष्कार कब और किसने किया
उत्तर: सन् 1895 ई. में जी मार्कोनी ने।
प्रश्न सिनेमा का आविष्कार कब और किसने किया
उत्तर: सन् 1883 ई. में थामस अल्वा एडीसन ने।
प्रश्न जनसंचार का नवीनतम लोकप्रिय साधन क्या है
उत्तर: इन्टरनेट
प्रश्न प्रमुख स्टिंग ऑपरेशन कौन से हैं
उत्तर: तहलका ऑपरेशन दुर्योधन या चक्रव्यूह
प्रश्न पत्रकारिता का मूल तत्व क्या है
उत्तर: जिज्ञासा और समाचार व्यापक अर्थों में पत्रकारिता का मूल तत्व है।
प्रश्न पत्रकारिता का सम्बन्ध किससे है
उत्तर: सूचनाओं का संकलन एवं उनका संपादन कर पाठकों तक पहुँचाना है।
प्रश्न समाचार में कौन-से तत्व आवश्यक है?
उत्तर: नवीनता जनरुचि निकटता प्रभाव
प्रश्न संपादन में मुख्य रूप से क्या आवश्यक है
उत्तर : तथ्यपरकता वस्तुपरकता निष्पक्षता तथा संतुलन ।
प्रश्न समाचार की परिभाषा लिखिए।
उत्तर: समाचार किसी भी ऐसी ताजा घटना विचार या समस्या की रिपोर्ट है जिसमें अधिक से अधिक लोगो की रुचि हो और जिसका अधिक से अधिक लोगों पर प्रभाव पड़ रहा हो।
प्रश्न संपादन का क्या अर्थ है
उत्तर: किसी सामग्री की अशुद्धियों को दूर कर उसे पठनीय बनाना।
प्रश्न पत्रकार की बैसाखियाँ किसे कहा जाता है
उत्तर: विश्वसनीयता संतुलन निष्पक्षता तथा स्पष्टता
प्रश्न संपादकीय किसे कहा जाता है
उत्तर: संपादक जिस पृष्ठ पर विभिन्न घटनाओं और समाचारों पर अपनी राय प्रकट करता है उसे संपादकीय कहते है।
प्रश्न पहले पृष्ठ पर प्रकाशित होने वाले हस्ताक्षरित समाचार को क्या कहते हैं
उत्तर: कार्टून कोना
प्रश्न पत्रकारिता के प्रमुख प्रकार बताइए।
उत्तर: खोजपरक पत्रकारिता विशेषीकृत पत्रकारिता वॉचडॉग पत्रकारिता एडव्होकेसी पत्रकारिता वैकल्पिक मीडिया।
प्रश्न खोजपरक पत्रकारिता से आप क्या समझते हैं
उत्तर: ऐसी पत्रकारिता जिसमें गहराई से छानबीन करके ऐसे तथ्यों और सूचनाओं को सामने लाने की कोशिश की जाती है जिन्हें दबाने या छिपाने का प्रयास किया जा रहा हो।
प्रश्न वॉचडॉग पत्रकारिता से क्या आशय है
उत्तर: किसी के सरकार के कामकाज पर निगाह रखते हुए किसी गड़बड़ी का पर्दाफाश करना वॉचडॉग पत्रकारिता कहलाती है।
प्रश्न एडव्होकेसी पत्रकारिता क्या है
उत्तर: किसी खास मुद्दे को उछालकर उसे पक्ष में जनमत बनाने का लगातार अभियान चलाना एडवोकेसी पत्रकारिता कहलाती है।
प्रश्न वैकल्पिक मीडिया से आप क्या समझते हैं
उत्तर: जो मीडिया स्थापित व्यवस्था के विकल्प को सामने लाने और उसके अनुकूल वैकल्पिक सोच को अभिव्यक्त करता है उसे वैकल्पिक मीडिया कहते हैं।
प्रश्न अखबार शब्द मूल रूप से किस भाषा का शब्द है
उत्तर: समाचार-पत्र को अरबी में अखबार कहते हैं। इसलिए ऐसा पत्र जिसमें खबरें ही खबरें हो अखबार कहलाता है।
प्रश्न अग्रलेख से क्या आशय है
उत्तर: एक ही संपादकीय स्तम्भ में दो या तीन संपादकीय लेख हों तो पहले को अग्रलेख व अन्य को संपादकीय टिप्पणियां कहते हैं।
प्रश्न एंकर का क्या अर्थ है? तथा उद्घोषक को हम किस अर्थ में लेते हैं
उत्तर: किसी टीवी कार्यक्रम को संचालित करने वाला अभिनेता या अभिनेत्री। रेडियो कार्यक्रम शुरू होने से पूर्व कार्यक्रम संबंधी या अन्य आवश्यक घोषणाएँ करने वाला उद्घोषक कहलाता है।
प्रश्न कतरन (क्लिपिंग) किसे कहते हैं
उत्तर: संपादकीय लेख, टिप्पणियाँ तैयार करने हेतु विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं से काटकर रखी गई कतरनों को क्लिपिंग कहते हैं।
प्रश्न कवरेज को हम किस अर्थ में लेते हैं
उत्तर: घटनास्थल पर पहुँचकर समाचारों का संकलन करना और उन्हें प्रकाशित करना कवरेज कहलाता है।
प्रश्न गजट को परिभाषित कीजिए।
उत्तर: वह सामयिक-पत्र जिसमें सरकारी सूचनाएँ प्रकाशित होती हैं
प्रश्न पत्रकारिता में छः ककार क्या हैं
उत्तर: पत्रकार कप्लिंग ने समाचार संकलन के लिए पाँच डब्ल्यू व एक एच का सिद्धांत दिया इसे ही हिन्दी में छः ककार का सिद्धांत कहते हैं। ये ककार हैं- कहाँ कब क्या किसने क्यों और कैसे।
प्रश्न टाइप के कितने अंग हैं
उत्तर: टाइप के 10 अंग हैं- काउंटर बॉडी सेरिफ फेस बिअर्ड शोल्डर पिन निक ग्रूव फुट।
प्रश्न टेलीप्रिंटर का कार्य क्या है?
उत्तर: विद्युत-चालित मशीन जिसकी सहायता से संवाद समितियों के समाचार अखबार के कार्यालय तक मशीन पर चढ़े कागज पर स्वतः टाइप होकर पहुँचते हैं।
प्रश्न डमी शब्द की व्याख्या प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर: इसे ले-आउट भी कहते हैं पत्र के पूरे आकार या छोटे आकार वाले कागज जिन पर समाचारों चित्रों विज्ञापनों की स्थिति की रूपरेखा दी जाती है।
प्रश्न डेटलाइन किसे कहते हैं?
उत्तर: प्रत्येक समाचार के शीर्षक के बाद और इंट्रो से पहले उस समाचार का स्थान व तारीख दी जाती है उसे डेटलाइन कहते हैं।
प्रश्न तड़ित समाचार (फ्लैश) से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: किसी विशेष समाचार का पूरा विवरण देने में देर लगने की स्थिति में उस समाचार का संक्षिप्त रूप न्यूज एजेंसी पत्र या रेडिया को दिया जाता है इसे फ्लैश कहते हैं।
प्रश्न पीत पत्रकारिता (यलो जर्नलिज्म) किसे कहते हैं?
उत्तर: कतिपय समाचार-पत्र सनसनीखेज खबरों और व्यक्ति-परक चरित्र-हनन जैसे समाचारों को अधिक महत्व देते हैं, ऐसी प्रवृत्ति को पीत पत्रकारिता कहते हैं।
प्रश्न प्रिंट लाइन को परिभाषित कीजिए।
उत्तर: प्रत्येक समाचार-पत्र या पत्रिका में संपादक प्रकाशक और मुद्रक का नाम अनिवार्य रूप से प्रकाशित किया जाता है, इस विवरण को ही प्रिंट लाइन कहते हैं।
प्रश्न फिलर पर टिप्पणी कीजिए।
उत्तर: वह छोटा-छोटा मैटर जो मेक-अप में खाली स्थान बचने पर उसे भरने के काम आता है।
प्रश्न फीचर किसे कहते हैं?
उत्तर: किसी रोचक विषय पर मनोरंजक शैली में लिखा गया लेख फीचर कहलाता है।
प्रश्न फॉलोअप क्या होता है
उत्तर: गत दिवस के अधूरे समाचार की अगली और नवीन जानकारी का प्रस्तुतीकरण ही फॉलोअप है।
प्रश्न वाइ-लाइन क्या है
उत्तर: संवाद के ऊपर दिया जाने वाला संवाददाता का नाम।
प्रश्न रि-पंच के बारे में लिखिये।
उत्तर: किसी समाचार का भेजने वाले केन्द्र से पुनःप्रेषण।
प्रश्न लाइन ब्लॉक क्या है
उत्तर: लाइनों से बने चित्र का ब्लॉक।
प्रश्न लीड क्या है
उत्तर: समाचार का मुख्य बिंदु जिसे पहले पैरा में दिया जाता है।
प्रश्न लेड क्या है
उत्तर: दो पंक्तियों के बीच जो स्पेस डाला जाता है वही लेड कहलाता है।
प्रश्न विज्ञापन एजेंसी का क्या कार्य है
उत्तर: ऐसी संस्था जो विज्ञापनदाताओं से उचित रकम पर विज्ञापन लेकर उसे तैयार करवाकर उचित माध्यमों को भेजती है।
प्रश्न शेड्यूल क्या है
उत्तर: महत्वपूर्ण समाचारों की सूची ही शेड्यूल है।
प्रश्न सर्वेक्षण (सबिंग) के विषय में बताइए।
उत्तर: किसी समाचार या लेख को इस प्रकार संक्षिप्त करना कि समाचार या लेख के सभी मुख्य अंश उसमें आ जाएँ।
प्रश्न संपादन के विषय लिखिए।
उत्तर: संपादन फिल्म निर्माण की एक रचनात्मक प्रक्रिया है। इसमें किसी फिल्म के शूट किए गए दृश्यों को कहानी के अनुसार कलात्मक ढंग से जोड़ा जाता है। ध्वनि एवं संगीत भी संपादन के अंतर्गत डाली जाती है।
प्रश्न समय सीमा के विषय में लिखिए।
उत्तर: किसी संस्करण के लिए वह अंतिम समय-सीमा जब तक मुद्रण विभाग द्वारा कंपोजिंग हेतु मैटर स्वीकार किया जाता है।
प्रश्न स्टैंडिंग मैटर के विषय में आप क्या जानते है
उत्तर: भविष्य मे पुनः छापने के लिए रोका गया कंपोज्ड मैटर।
प्रश्न स्तंभ को परिभाषित कीजिए।
उत्तर: पत्र-पत्रिका के पृष्ठ का वह भाग या किसी विशेष विषय के लिए निर्धारित स्थान को स्तंभ के रूप में जानते हैं।
प्रश्न फ्रीलांसर या स्वतंत्र पत्रकार किसे कहते हैं
उत्तर: फ्रीलांसर या स्वतंत्र पत्रकार उन्हें कहते हैं जिनका किसी विशेष एक समाचार पत्र से संबंध नहीं होता । ऐसे पत्रकार भुगतान के आधार पर कार्य करते हैं।
प्रश्न हेड रूल से क्या आशय है?
उत्तर: वह रेखा जो पृष्ठ के उपर क्षैतिज डाली जाती है ताकि नीचे का मैटर तारीख और संख्या आदि से समाचार पत्र का नाम अलग रहे।
प्रश्न फीडबैक किसे कहते है
उत्तर – संचार प्रक्रिया में संदेश को प्राप्त करने वाला जो सकारात्मक या नकारात्मक प्रतिक्रिया करता है उसे फीडबैक कहते हैं।
प्रश्न पत्रकारिता के पहलुओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर – पत्रकारिता के तीन पहलु हैं –
1 समाचारों को संकलित करना।
2 उन्हें संपादित कर छपने लायक बनाना।
3 पत्र या पत्रिका के रूप में छापकर पाठकों तक पहुॅचाना।
प्रश्न किन्हीं दो समाचार एजेंसियों के नाम लिखिए।
उत्तर: पी. टी. आई. भाषा
यू. एन. आई. यूनिवार्ता
प्रश्न संपादकीय के प्रमुख सिद्धांत लिखिए।
उत्तर: 1तथ्यों की शुद्धता
2 वस्तुपरकता
3 निष्पक्षता
4 संतुलन
5 स्रोत
प्रश्न पूर्णकालिक पत्रकार कौन होता है?
उत्तर: ऐसा पत्रकार जो किसी समाचार संगठन में काम करता है और नियमित वेतन पाता है उसे पूर्णकालिक पत्रकार कहा जाता है।
प्रश्न संवाददाता या रिपोर्टर किसे कहते है
उत्तर: अखबारों में समाचार लिखने वालों को संवाददाता या रिपोर्टर कहते हैं।
प्रश्न अंशकालिक पत्रकार से आप क्या समझते हो?
उत्तर: सीमित या कम समय के लिए काम करने वाले पत्रकार को अंशकालिक पत्रकार कहा जाता है। इन्हें प्रकाशित सामग्री के आधार पर पारिश्रमिक दिया जाता है।
प्रश्न समाचार-लेखन की दो शैलियाँ कौन-कौन सी हैं
उत्तर : 1 सीधा पिरामिड शैली – इसमें समाचारों के सबसे महत्वपूर्ण तथ्य को पहले पैराग्राफ में उससे कम महत्व की सूचना या तथ्य की जानकारी उसक बाद दी जाती है।
2 उल्टा पिरामिड शैली: यह शैली समाचारों का ऐसा ढॉंचा ह जिसमें आधार ऊपर और शीर्ष नीचे होता है उसमें समाचारों का क्रम होता है – समापन बॉडी और मुखड़ा। यह सबसे लोकप्रिय और बुनियादी शैली है।
प्रश्न डेस्क से क्या आशय है
समाचार माध्यमों में डेस्क का आशय संपादन से होता है। समाचार माध्यमों में मोटे तौर पर संपादकीय कक्ष डेस्क और रिपोर्टिंग में बँटा होता है। डेस्क पर समाचारों को संपादित कद अपने योग्य बनाया जाता है।

सौजन्‍य – स्‍नातकोत्‍तर हिन्‍दी शिक्षकों का प्रशिक्षण शिविर, वाराणसी

सीबीएसई परीक्षा सम्‍बन्‍धी अन्‍य महत्‍वपूर्ण प्रश्‍न-अभ्‍यास

1. उल्टा पिरामिड शैली क्या होती है?
2. पत्रकारिता की भाषा में ‘बीट’ किसे कहते हैं?
3. पत्रकारिता का मूल तत्व क्या है?
4. फीचर लेखन और समाचार में क्या अन्तर है?
5. छह ककार कौन से हैं?
6.‘पेज थ्री’ पत्राकारिता का तात्पर्य क्या है?
7. ‘स्तम्भ लेखन’ से क्या तात्पर्य है?
8. ‘डेड लाइन’ क्या है?
9. ‘पत्रकारीय लेखन’ और ‘साहित्यिक सृजनात्मक लेखन’ में क्या अन्तर है?
10. फीचर लेखन की भाषा शैली कैसी होनी चाहिए? 111.संचार के प्रमुख तत्‍व कौन-कौन से हैं?
12. भारत में प्रकाशित होने वाला पहला समाचार-पत्र कौन-सा है?
13.समाचार के प्रमुख तत्‍वों का उल्‍लेख कीजिए।
14. भारत में बेब-पत्रकारिता की प्रमुख बेबसाइटों के नाम बताइए।
15. समाचार किस शैली में लिखा जाता है?
16.रेडियो समाचार की संरचना किस शैली पर आधारित होती है।
17.इंटरनेट पत्रकारिता के लोकप्रिय होने का सबसे प्रमुख कारण क्‍या है।
18.बीट किसे कहते हैं।
19.पत्रकारीय लेखन क्‍या है।
20.मुद्रित माध्‍यम में लेखक को किन-किन बातों का ध्‍यान रखना होता है।
21. बीट रिपोर्टिंग और विशेषीकृत रिपोर्टिंग में क्‍या अंतर है।
22. पत्रकारिता के संपादन में किन सिद्धांतों का पालन करना अनिवार्य है।
23.प्रिंट माध्यम से क्या तात्पर्य है।
24.टेलीविज़न समाचारों में एंकर बाइट क्यों जरूरी है।
25.इंटरनेट किसे कहते हैं।
26. फ्री लांस पत्राकार किसे कहा जाता है।
27.रेडियो नाटक से आप क्या समझते हैं।