यमलोक में पार्टी (डॉ. रामकुमार सिंह द्वारा लिखित प्रहसन नाटक)


पहला दृश्‍य
(यमराज का दरबार। वे प्रसन्‍न नजर आ रहे हैं। चित्रगुप्‍त चश्‍मा लगाए हिसाब-किताब कर रहे हैं।)
यम : यम हैं हम। चित्रगुप्‍त, हम अत्‍यधिक प्रसन्‍न हैं। यमलोक में खूब चहल-पहल है। यहॉं नागरिकों की संख्‍या बढ़ती ही जा रही है। चित्रगुप्‍त : ठीक कहा महाराज। जितनी ज्‍यादा जनता, उतने ज्‍यादा वोट।
यम : चित्रगुप्‍त, आज यमलोक में एक पार्टी का आयोजन किया जाय, जिसमें देवता, दैत्‍य,ऋषि सभी शामिल हों। चित्रगुप्‍त : ठीक कहा महाराज। जनाधार के लिए हर वर्ग और समुदाय के लोग होने ही चाहिए।
महाराज अभी-अभी हमारे यमदूत जिस चटोरे मानव को लेकर आए हैं उसके हाथ में मृत्‍युलोक के लजीज व्‍यंजनों का आकर्षक छपाई वाला एक मीनू-कार्ड है महाराज।
आपकी आज्ञा हो तो इस बार पृथ्‍वी-लोक का उगाया और पकाया गया अन्‍न ही पार्टी का मुख्‍य आकर्षण्‍ा रख दिया जाए।
यम : वाह, वाह। अति उत्‍तम विचार है। हमने भी काफी दिनों से ह्रीम-क्रीम नहीं खाई। चित्रगुप्‍त : ह्रीम-क्रीम नहीं, आइसक्रीम महाराज।
यम : हुं हुं (खांसते हुए) वही , वही।

दूसरा दृश्‍य
(यमलोक में पार्टी चल रही है। ब्रह्मा जी,शंकर जी और देवराज इन्‍द्र सहित सभी देवता आए हैं। कुंभकर्ण भी नींद से जागकर आ गया है। अन्‍य दैत्‍य भी हैं। खाने-पीने के लिए मशहूर अगस्‍त्‍य ऋषि भी पधार चुके हैं, धुंआधार पार्टी चल रही है। शिवजी के भूत-प्रेत डीजे की धुन पर डांस कर रहे हैं। अचानक कोई पेट पकड़ लेता है तो कोई उल्‍िटयॉं करने लगता है। कोई वॉशरूम की तरफ भागता है)

तीसरा दृश्‍य
चित्रगुप्‍त बदहवास भागता हुआ यमराज को खबर करता है।
चित्रगुप्‍त: महाराज, महाराज। गजब हो क्‍या। यम : भारत की बिजली-समस्‍या के ब्‍लैक-आउट से बड़ा क्‍या गजब हो सकता है चित्रगुप्‍त। बोलो, कुपोषित मानव की तरह तुम्‍हारा चेहरा क्‍यों उतरा हुआ है।
चित्रगुप्‍त : महाराज, पार्टी में कई लोगों का पेट खराब हो गया है।, उल्‍िटयॉं हो रही हैं। बड़े-बडे़ दिग्‍गज वॉशरूम की तरफ दौड़ रहे हैं।
यमराज : (चौंकते हुए) ऍं, इसका क्‍या कारण है चित्रगुप्‍त।
चित्रगुप्‍त : महाराज, बिना उगाया अन्‍न और बिना श्रम के पकाया जाने वाला खाद्य खाने वाले देवता जो सदैव अभिनेताओं द्वारा अनुशंसित वाटर-फिल्‍टर का ही पानी पीते हैं, उनके सहित विभिन्‍न दैत्‍य, और लम्‍बी डकार लेने वाले चिरंजीवी ऋषि, ये सभी मृत्‍युलोक के भोजन से बीमार पड़ गये हैं, महाराज।
यम: क्‍या कहते हो।।।।।
चित्रगुप्‍त : सत्‍य कहता हूँ महाराज, देवताओं ने 20 मिनिट में पिज्‍जा हाजिर करवाया था। अब इतनी ही देर में एम्‍बुलैंस बुलाने की जरूरत आ पड़ी है। सारे देवता झिंगा-लाला हो रहे हैं, अब गए कि तब गए।।। ऊपर से पूरा फास्‍ट-फूड मीनू चाट गए हैं।
यम : ग्रहों की क्‍या स्‍थिति है चित्रगुप्‍त : बुरा हाल है महाराज, सबसे ज्‍यादा कुशल पाचन-तंत्र वाले शनि की दशा खराब चल रही है। शनि चाट-पानीपूरी, नूडल्‍स और पावभाजी का बड़ा शौकीन है। अब औंधे मुँह डला है। पृथ्‍वीलोक का कोई भी डॉक्‍टर ‘सत्‍यमेव जयते’ के इश्‍यू की वजह से शनि का फोन रिसीव नहीं कर रहा है।
यम : अगस्‍त्‍य ऋषि तो समु्द्र पीकर पचा गए थे………
चित्रगुप्‍त : मगर रासायनिक कोल्‍ड-ड्रिंक्‍स नहीं पचा सके महाराज। 30 मिनिट का रास्‍ता 3 मिनिट में तय करते हुए बस आपके पास आते ही होंगे।
यम : इससे तो लगता है……धरती लोक के खाद्य-पदार्थ सिर्फ दैत्‍य ही पचा सकते हैं…..
चित्रगुप्‍त : गलतफहमी में न रहें महाराज। कुंभकर्ण को भी एसिडिटी हो गई है। उसकी नींद भी उड़ गई है। दैत्‍यलोक से उसके फेमिली डॉक्‍टर का कहना है कि नींद की दवाईयॉं मृत्‍युलोक से ही लानी पड़ेंगीं। लेकिन कुंभकर्ण के लायक डोज उपलब्‍ध ही नहीं है। सरकारी अस्‍पताल की दवाईंयॉं ब्‍लैक में चली गई हैं। एन्‍टा-एसिडों में भी मिलावट की खबर है।
यम : ऐसा क्‍या खा लिया उसने……. चित्रगुप्‍त : महाराज, प्रतिबंधित खोए की मिठाईयॉं खा गया महाराज, कहता था – ‘कुछ मीठा हो जाए’। यह भी कहता था – ‘हर एक स्‍वीट जरूरी होता है’। आखिरकार हालत खराब।।। यम : तो क्‍या धरती पर मिठाइयॉं भी दूषित हो गई हैं। वहॉ भगवान का भोग नहीं लगाते क्‍या।।।।।। चित्रगुप्‍त : लगाते हैं महाराज।।।।
यम : फिर भगवान अब तक कैसे बचे हैं।।।।।
चित्रगुप्‍त : भोग लगाकर वापस उठा लिया जाता है महाराज, इसलिए भगवान अब तक वहॉं से नहीं उठे हैं।
यम : हूँ……संभवत: इसीलिए धरतीलोक भगवान भरोसे चल रहा है। चित्रगुप्‍त : महाराज, पितामह ब्रह्माजी ने नारद की अध्‍यक्षता में एक जॉंच-कमेटी बनाई है जो मामले की जॉंच करने जा रही है, सरक्‍यूलर रेडी है, आपके हस्‍ताक्षर चाहिए। यम : अवश्‍य, अवश्‍य…(एक बहुत लम्‍बे पेन से सिंहासन पर बैठे हुए दूर से ही हस्‍ताक्ष्‍ार करते हैं)


चौथा दृश्‍य
(ब्रह्माजी और यमराज विराजमान हैं। नारद अपने जॉंच दल के साथ आते हैं। साथ में एक खाद्य अधिकारी और डाक्‍टर भी है।)

नारद : नारायण, नारायण। परमपिता और यमराज की जय हो। (रिपोर्ट की कॉपी लेकर पढ़ते हैं।)आज इस सदन के प्रश्‍नकाल में उठे सवालों के जबाब में जॉंच दल की रिपोर्ट लेकर में उपस्‍थित हूँ। महाराज, रिपोर्ट में हमेशा की तरह कई चौंकाने वाले तथ्‍य सामने आए हैं। मृत्‍युलोक में अन्‍न उगाने से लेकर ही रसायनों का उपयोग शुरू हो जाता है। दूध, घी, खोया, ये सभी रासायनिक विधि से बनाए जा रहे हैं। कृत्रिम रंग और कृत्रिम स्‍वाद जोरों पर है। विज्ञापनों का खर्च भी मिलावट कर पूरा किया जा रहे है। अनाप-शनाप तरीके से जनता-जनार्दन मिलावटी खाद्य-पदार्थों को मुँह में ठूँसे जा रहे हैं।
माननीय महोदय, यमलोक की पार्टी में ब्रह्माजी के दॉंत न होने से ऑंतें सुरक्षित बच गईं। पालनहार विष्‍णु धरती के एक शुद्धभोजी विद्यालय के एनुएल फंक्‍शन में गए हुए थे। अत: सुरक्षित हैं। पार्टी में भगवान शंकर को छोड़कर इस जहर को कोई नहीं पचा सका है। देवताओं के राजा इन्‍द्र भी हर मौसम आम का मजा ले रहे है, अब आम आदमी के अस्‍तपाल में भर्ती हैं।
ब्रह्मा जी : हूँ…..खाद्य विभाग और औषधि विभाग की तैनाती का क्‍या हुआ।।। नारद जी : जनता-जनार्दन जागरूक नहीं है परमपिता,ये खाद्य अधिकारी मिलावट में भी मिले हुए हैं। ये जो डॉक्‍टर हमें धरतीलोक पर मिले हैं, वे भी मिलावटी औषधियों कमीशन मिलाए हुए हैं। इस मिली-जुली रिपोर्ट में जो भी परिणाम मिला है सब मिलावट को उत्‍तरदायी मानता है।
यम : (अपना सिर पकड़ते हुए) : ओह। ……अब समझ में आया हमारे यमलोक में इतनी जनसंख्‍या क्‍यों बढ़ रही है।
(पटाक्षेप)

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*टिल्लू* बाल-कहानी (एक विद्यार्थी के आग्रह पर)

 

 टिल्लू ने अंडे को फोड़कर अपना सिर बाहर निकाला। नन्हीं – नन्हीं ऑंखें  उसने सबसे पहले एक बड़ी चिड़िया को देखा जिसकी आंखों में अपार ममता भरी थी। यह टिटहरी कोई और नहीं उसकी मां थी जो गला फाड़-फाड़कर चिल्ला रही थी – टि टी टि हुट् – टि टी टि हुट्। इस आवाज से टिल्लू के चिपके हुए कान पहली बार भीतर तक खुल गये।

टिल्लू सारी दुनियां को पहली-पहली बार देख रहा था। पेड़, घर और आकाश। तभी हवा का एक झोंका आया और उसके बदन में मीठी-सी गुदगुदी  दौड़ गई। तब उसे महसूस हुआ कि  एक छोटी-सी चॉकलेट जैसा उसका शरीर भी है। नन्हें पैरों को अंडे के मुंह से बाहर निकालकर उसने दुनियां में पहला कदम रखा…..जोर की अंगड़ाई ली। वह चौड़ी छाती किये दुनियों के बीचों-बीच खड़ा था।

टिटहरी ने लपककर टिल्लू को अपनी गोद में भर लिया। अपनी मां के मखमली आलिंगन में लिपटकर टिल्लू मगन हो गया। उसने पहली बार रेशमी रेशों की गर्माहट महसूस की। टिटहरी ने बैठकर अपने पंख फैला लिये। टिल्लू उसकी गोद में ऐसा समा बैठा था कि दूर से केवल टिटहरी नजर आती थी।

खण्डहर की जिस दीवार के ऊपर टिटहरी ने अण्डे दिये थे ठीक उसके सामने माइकल का घर था। माइकल तीसरी कक्षा में पढ़ता है। टिल्लू और माइकल के घर के बीच एक मैदान था जहां कई पशु-पक्षियों का डेरा सारे दिन जमा रहता।

माइकल को स्कूल के लिये तैयार करते वक्त उसकी मां याद करती है कि जब माइकल पैदा हुआ था तो नन्हें पक्षी की तरह था। बूढ़ी नर्स जैना ने बताया था कि हवा लगने के साथ-ही नन्हा बच्चा तेजी से बड़ा होता जाता है। वह हाथ-पैर फैलाता है….शरीर साधता है।

खण्डहर की दीवार पर टिटहरी चल रही थी। पीछे-पीछे टिल्लू भी अपनी माँ की नकल कर रहा था। उसके पैर लड़खड़ा  रहे हैं…जैसे सर्कस मे कोई कलाकार रस्सी पर चलना सीख रहा हो। ……अचानक तेज हवा का झोंका आया, टिल्लू के पैर दीवार का साथ छोड़ बैठे। नन्हा टिल्लू हवा में तैरता नीचे की तरफ जाने लगा। उसके पंखों ने अभी फैलना और फड़फड़ाना नहीं सीखा था। पर उसका शरीर इतना हल्का था जैसे पेराशूट लगा रखा हो। टिटहरी ने जोर-जोर से चीखना शुरू किया टि टी टि हुट्   टि टी टि हुट्। वह उसके पीछे ही उड़ी।

टिल्लू मैदान में गिरा। वह हड़बड़ाया हुआ था मगर उसे चोट नहीं आई थी। टिटहरी टिल्लू के चारों ओर सुरक्षा का घेरा बनाये चिल्लाती जा रही था, ताकि कोई पशु पक्षी टिल्लू के पास ना आये।

मैदान में बैठी बकरी, गाय और काली चिड़ियों के कान खड़े हो गये। टिटहरी ने चिल्ला चिल्लाकर सभी कोखदेड़ना शुरू कर दिया। कर्नल का लाल-भूरा डॉगी ललचायी नजरों से टिल्लू के नरम-नरम शरीर को देख रहा था मगर टिटहरी की जोरदार आवाज और तैयारी के सामने उसकी आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं हुई। टिल्लू के आसपास का सारा मैदान खाली हो गया। टिटहरी चौकन्नी और पूरी तरह तैयार थी। इस समय उसकी चोंच तलवार की तरह लहरा रही थी। टिल्लू पर कोई आंच आने से पहले वह हमलावर पर आक्रमण कर देगी। उसने टिल्लू को अपने गुदगुदे आंचल में छुपा लिया। पंख फैलाये । वह चिल्लाये जा रही थी……टि टी टि हुट्   टि टी टि हुट्।

माइकल के दिल की धड़कन बढ़ गई। वह स्कूल के लिये निकलते वक्त यह सब देख रहा था। सभी कुछ इतनी जल्दी हुआ कि उसकी समझ में नहीं आ रहा था वह क्या करे। उधर स्कूल की घंटी बज गई थी। उसके पैर स्कूल की तरफ बढ़ रहे थे लेकिन उसका मन वहीं था। वह देखना चाहता था कि टिल्लू को उसकी माँ खतरों भरे मैदान से उठाकर दीवार के ऊपर कैसे ले जा पायेगी? वह बारबार कोशिश कर रही थी मगर टिल्लू को अपने साथ उठाकर ले जाने में कामयाब नहीं हो पा रही थी। माइकल मुड़-मुड़कर देखता जा रहा था।

छुट्टी के समय माइकल उदास मन और भारी  कदमों से घर की ओर लौट रहा था। उसे बार-बार कर्नल के भूरे लाल कुत्ते की की ललचाई आंखे और जीभ याद आ रही थी। पता नहीं टिल्लू का क्या हुआ होगा……?

घर के नजदीक आते-आते माइकल इतना खोया हुआ था कि उसे पता हीं नहीं चला कि कब स्कूल के एक बड़े लड़के ने तेज साइकल से उसे टक्कर मार दी। माइकल सड़क के किनारे गिर पड़ा। थोड़ी देर में उसे खुद को अपने घर में पाया उसके कानों में आवाज लगातार गूंज रही थी। क्या हुआ मेरे बेटे…..माइकल तुम ठीक तो हो….। उसे माँ की गोद पहली बार ज्यादा मखमली और गर्माहट वाली लगी। आज माँ का हाथ भी उसे माथे को ऐसे सहला रहा था जैसे आसमान से उसे कोई ताकत दे रहा हो। वह मां की गोद की उस गर्माहट में छुपता जा रहा था। उसे मीठी नींद आने लगी। अचानक उसे कुछ याद आया…….उसे मां की गोद से सिर निकालकर सामने वाले खण्डहर की दीवार पर देखा । दीवार के ऊपर टिल्लू आराम से अपनी मां की गोद में छुपा बैठा था। टिटहरी पंख फैलाये उसे सहला रही थी।

अगली सुबह माइकल बहुत ताजगी महसूस कर रहा था। वह जल्दी-जल्दी स्कूल के लिये तैयार हुआ आज स्कूल में मदर्स डे का प्रोग्राम होना था। मैदान से गुजरते वक्त कोई फुर्र उसके सिर से निकल गया माइकल ने आसमान की तरफ देखा तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। नन्हा टिल्लू अपनी मां के साथ उड़ान भर रहा था।