युद्ध की विभीषिका पर सृजन का शंखनाद है केन्द्रीय विद्यालय संगठन: उपायुक्त श्री रावत

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चण्डीगढ़(जेडआईईटी से डाॅ. रामकुमार सिंह)। वर्ष 1964 जहाँ भारत-चीन युद्ध की विभीषिका से विराम को याद दिलाता है तो वहीं इसी वर्ष केन्द्रीय विद्यालय संगठन का शुभारम्भ किया जाना युद्ध की विभीषिका से उपजे उत्तर-युग में सृजन का शंखनाद है।
उक्त उद्गार केन्द्रीय विद्यालय संगठन, चण्डीगढ़ संभाग के उपायुक्त एवं शिक्षा एवं प्रशिक्षण आंचलिक संस्थान के प्रभारी निदेशक श्री जे एम रावत ने पीजीटी एवं टीजीटी-हिन्दी तथा पीआरटी शिक्षकों के सेवाकालीन प्रशिक्षण के लिए चयनित दलों के निदेशक, सम्बद्ध-निदेशक एवं संसाधकों को सम्बोधित करते हुए कहा। तीन दिवसीय इस अभिविन्यास कार्यक्रम मंे लगभग एक दर्जन संभागों आगरा, गुड़गांव,गुवाहाटी, दिल्ली, पटना, भोपाल, रायपुर, लखनऊ, वाराणसी और चण्डीगढ़ के दलों ने हिस्सा लिया।
श्री रावत ने कहा कि हमारी (केविसं) की जड़ों में मानवीयता है। उन्‍होंने काव्यमय अंदाज में अकादमिक प्रतिबद्धताओं को रेखांकित करते हुए कहा कि जीवन के प्रति शाश्वत प्रेम को बनाये रखना शिक्षक का दायित्व है। अगली पीढ़ी को जो प्रदाय करना है उस पर हमारे और आपके दोनों के ही दस्तखत (सांझे प्रयास) की जरूरत है। उन्होंने कहा कि संकटों में ही पौरुष की पहचान होती है। उन्होंने प्रसिद्ध कवि नीरज के हवाले से कहा जिंदगी ‘वेद’ की तरह है मगर परिस्थितिवश वह ‘जिल्द बनाने में कटी’ यह नहीं होने पाये। दर्प की आंधियां भले ही व्यक्तित्व की जड़ों को हिलाने का प्रयास करे मगर व्यक्ति को एक चुनौती के रूप में परिस्थितियों के सामने खड़ा होना होगा।

उपायुक्त श्री रावत ने कहा कि विद्यार्थी की Needs, interest   औरproblems को समझने की जरूरत शिक्षक की प्राथमिकता है। उन्होंने मैस्लो के सिद्धांत का हवाला देते हुए का कि प्राथमिक से शीर्ष आवश्यकताओं के क्रम को समझकर सीखने की प्रक्रिया को सफल बनाया जा सकता है।
उपायुक्त श्री रावत ने इससे पूर्व मां सरस्वती का पूजन और पुष्पार्पण का कार्यक्रम का शुभारंभ किया। सभी प्रतिभागियों ने सर्वधर्म समभाव पर आधारित सामूहिक प्रार्थना में हिस्सा लिया। कार्यक्रम का सफल संचालन संस्थान में हिन्दी विषय की संयोजिका श्रीमती सुनीता गुंसाई ने किया।
श्री रावत ने अपने उद्बोधन के साथ ही पीपीटी के माध्यम से दिये गये अपने व्याख्यान में केविसं द्वारा प्रशिक्षण कार्य की उपादेयता और प्रशिक्षण के उद्देश्य आदि के बारे में विस्तार से प्रकाश डाला।

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