नाथ सैल पर कपिपति रहई………….

अंजनि पर्वत, ऋष्‍यमूक पर्वत और तुंगभद्रा के पर्वतीय अंचल की सैर……

वही सैल जहॉं से राम को सुग्रीव की मित्रता मिली, इससे भी बढकर उन्‍हें हनुमान से भक्‍त मिले और, सबसे बढकर ये कि शबरी को अपने राम मिले। जी हॉं, हम बात कर रहे हैं कि कर्नाटक में हम्‍पी के निकट स्‍थित सांस्‍कृतिक-पर्यटन के महत्‍वपूर्ण्‍ा स्‍थल ऋष्‍यमूक पर्वत, अंजनि पर्वत, मतंग ऋषि का आश्रम और तुंगभद्रा नदी के उस पार वह गहन प्रांतर जहॉं से राम के सैन्‍य संगठन को मुक्‍त आकाश मिला।

(हनुमान जी के जन्‍मस्‍थल से नीचे की ओर एक विहंगम दृश्‍य : सर्जना)
कर्नाटक के बैल्‍लारी जिले से सडक मार्ग से हॉस्‍पेट पँहुचने पर आप यहॉं बडी ही आसानी से उपलब्‍ध स्‍थानीय वाहनों से यहॉं तक का रास्‍ता तय कर सकते हैं। अंजनि पर्वत वह स्‍थान है जिसे हनुमान जी का जन्‍मस्‍थल कहा जाता है। ऐसे तो देश में ऐसे कई स्‍थान विशेषकर महाराष्‍ट्र से शुरू करते हुए दक्षिण प्रांतों में, ऐसे हैं जिन्‍हें हनुमान जी के जन्‍मस्‍थल के रूप में धार्मिक मान्‍यता है, तथापि इस स्‍थल को मिथकीय इतिहास के भूगोल के अनुसार अधिक प्रामाणिक माना जाता है। अंजनि पर्वत की ऊँचाई काफी अधिक और आप थकान यदि महसूस नहीं कर रहे हैं तो आशय यह है कि आप अधिक उत्‍साहित हैं। हम लोग ऊपर पँहुचे तो रामचरित मानस पाठ चल रहा था, अयोध्‍या के एक संत यहॉं स्‍थान के प्रबंधक हैं। यहॉं के नजदीकी गॉंव का नाम है ‘हनुमनहल्‍ली’ कन्‍नड के मुताबिक इसका अर्थ है – हनुमान का गॉंव ।

(अंजनि-पर्वत पर चढने के लिए प्रवेश द्वार)
ऊँचाई से तुंगभद्रा नदी का मनोरम दृश्‍य है। श्‍यावर्णीय पथरीले पर्वतों की श्रंखला उस भय का आभास करा देती है जिसको महामानव राम ने सहज ही जीत लिया था।
नीचे उतर कर आगे चलें तो मनोरम पंपा सरोवर पहुँचा जा सकता है। स्‍थल से ओर अधिक आगे की यात्रा करेंगे तो ऋष्‍यमूक पर्वत पर जा सकते हैं। एक ओर फटिक सिला है जहॉं राम ने विश्राम किया और मानस में यहॉं का ऋतु वर्णन है। अस्‍तु, हम लोग देर शाम होने के कारण यहीं से वापस लौट आये। आगे के स्‍थलों पर फिर कभी। …..

(अंजनि-पवर्त स्‍थित हनुमंत लाल का दुर्लभ दर्शन, फोटो लेते समय फटकार मिली : सर्जना)

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