पुनर्प्रकाशन/Re-publication

इस श्रेणी में मेरी वे वस्‍तुऍं हैं जो पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकीं हैं ।

गांधी को प्रासंगिक नहीं रहने देंगे हम ” – अग्रलेख

बैठ कुर्सी पर वो उत्सव बन गये/आप-औ’ हम शामियाने हो गये …..हिन्दी गज़ल

”भूख है तो सब्र कर, रोटी नही तो क्या हुआ”/दुष्यंत : सामाजिक पीड़ा की प्रखर अनुभूति” – अग्रलेख

‘सर्जनात्मक अध्येता का समीक्ष्य से एकात्म होना’” – पुस्‍तक-समीक्षा

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