
गॉंव में एक ऊंचा प्रवेश द्वार। अगल-बगल खडे़ हैं पत्थर के बैल, होरी जैसे किसान और बूढ़ी काकी जैसी कुछ पथरीली मूर्तियाँ। जी हॉं आप प्रवेश कर रहे हैं लमही गॉंव में। जहॉं प्रेमचंद और उनके परिवार तो कोई नहीं, हॉं लहलाती पीली सरसों है, प्रेमचंद के नाम से पुस्तकालय, पैत्रक घर के बोर्ड और ……
… स्वयंसेवक के बतौर प्रेमचंद स्मारक ट्रस्ट का काम देखने वाले दुबे जी।
एक कमरे में सजाई हुई हैं प्रेमचंद की अनेक प्रकाशित किताबें, उनकी तस्वीरें और तरह-तरह की चीजें जिससे माहौल पूरा म्यूजियम जैसा लगे।
बरहाल इतना तो है कि यहॉं आकर आप महसूस कर सकते हैं कि प्रेमचंद कितने आम आदमी रहे होंगे। महान लेखन आसमान से नहीं उतरते। कलाकार जितना आम आदमी के बीच से होगा उतना ही काल से होड़ करने वाला होगा।
पिछली बार बारह दिन बनारस में बिताए तो लमही तक आने की लालसा शेष रह गई थी। बनारस अजूबा इस मामले में है कि ये अनेक महानतम स्थानों, (जिनमें साहित्यिक मसले सर्वाधिक हैं ही) का ऐसा गुच्छ है कि क्य कहें। तो आखिरकार लगभग अर्धशतकीय शिक्षक साथियों के साथ आ धमके प्रेमचंद की स्मृतियों से रूबरू होने।
प्रांगण में प्रेमचंद की मूर्ति स्थापित है। जीर्णाद्धार के बाद यहां के कक्ष इत्यादि नये कलेवर में हैं। दो कमरे है जिनमें एक पुस्तकालय बना दिया गया है। प्रेमचंद को जो चीजें या जिस तरह की चीजें पसंद रहीं उनका नमूना रख दिया गया है। ट्रस्ट का काम देख रहे दुबे जी अपने हाथ प्रेमचंद के कागजातों और पाण्डुलिपियों की छायाप्रति जैसी अनेक चीजें रखते हैं और सैलानियों को दिखाते रहते हैं। मौका मिला तो सर्जना के लिए उनसे बातचीत रिकार्ड कर ली।
बरहाल, लमही के लम्हे……बस इसलिए यादगार हैं कि जाते हुए साल 2011 को विदाई यहीं दी…..प्रेमचंद के घर में।

(लमही गॉंव की सरसों ‘हो गई सबसे सयानी’)

(मुंशी प्रेमचंद के पैत्रक घर के बोर्ड के पास श्री धीरेन्द्र कुमार झा व श्री टी एन सिंह के साथ)

(प्रेमचंद जी के पैत्रक घर में स्थापित उनकी प्रतिमा)

(प्रेमचंद स्मारक ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री दुबे जी से चर्चा)

(प्रेमचंद जी के निवास के भीतरी कक्ष की सामग्रियॉं)

(प्रेमचंद जी के निवास के भीतरी कक्ष की सामग्रियॉं)

(प्रेमचंद जी के निवास के भीतरी कक्ष की सामग्रियॉं)

(प्रेमचंद जी के निवास के भीतरी कक्ष की सामग्रियॉं)

(प्रेमचंद जी के निवास के भीतरी कक्ष की सामग्रियॉं)

(प्रेमचंद जी के निवास के भीतरी कक्ष की सामग्रियॉं)

(प्रेमचंद जी के निवास के भीतरी कक्ष की सामग्रियॉं)

(प्रेमचंद जी के पैतृक घर में श्री विजय कुमार, डॉ विनीता राय व अन्य साथी)




