इस श्रेणी में मेरी प्रकाशित या अप्रकाशित मुख्य पुस्तक-समीक्षाओं का संकलन है।स्वयं के अलावा मित्रों द्वारा प्रेषित समीक्षाएँ भी हैं। फिलहाल यहॉं उपलब्ध समीक्षाऍं इस तरह हैं, आप क्िलक कर सकते हैं -

इकत्तीस छिपकलियों का भय – कवि गोपाल सिंह की दुर्लभ पुस्तक की समीक्षा – डॉ रामकुमार सिंह
”नहीं किसी को बहुत अधिक हो /नहीं किसी को कम हो” : दिनकर की ‘कुरूक्षेत्र’ – पर रामबरन सरस्वतीपुत्र
भूख है तो सब्र कर, रोटी नही तो क्या हुआ” : दुष्यंत कुमार की ‘साये में धूप’ पर डॉ रामकुमार सिंह
‘किसी को तो शिव बनना होगा’ : डॉ विनय राजाराम की किताब पर डॉ. शेषकुमारी सिंह
‘सर्जनात्मक अध्येता का समीक्ष्य से एकात्म होना’ : सविता मिश्र की पुस्तक पर डॉ रामकुमार सिंह का लेख
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