इस श्रेणी में फुटकर गजल हैं। जो समय समय पर जारी की जाती रहीं हैं। मित्रों की फुटकर गजलों की भी प्रतीक्षा है।
बैठ कुर्सी पर वो उत्सव बन गये/आप-औ’ हम शामियाने हो गये …..हिन्दी गज़ल – रामकुमार सिंह
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बैठ कुर्सी पर वो उत्सव बन गये/आप-औ’ हम शामियाने हो गये …..हिन्दी गज़ल – रामकुमार सिंह
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